हल्द्वानी। संस्कृत के प्रति विद्यार्थियों में रुचि बढ़ाने, भारतीय ज्ञान परंपरा से उन्हें जोड़ने तथा संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संस्कृत विभाग में संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन शुरू हो गया है।
24 अगस्त से प्रारंभ हुए संस्कृत सप्ताह के तहत विभाग में शैक्षणिक एवं रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम के दौरान श्लोकोच्चारण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोध विद्यार्थियों ने मनोहारी एवं भावपूर्ण श्लोकों का उच्चारण कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इसके अलावा पोस्टर प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता एवं समूह गान प्रतियोगिता में भी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की। प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा एवं भारतीय संस्कृति के विभिन्न पक्षों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. लज्जा भट्ट ने की। उन्होंने संस्कृत भाषा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा सार्वकालिक एवं सार्वभौमिक है, जो नैतिक मूल्यों के उत्कर्ष का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, दर्शन, साहित्य एवं ज्ञान परंपरा को गहराई से समझने के लिए संस्कृत का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है।
प्रो. भट्ट ने कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-विज्ञान, संस्कृति और चिंतन की महत्वपूर्ण आधारशिला है। उन्होंने विद्यार्थियों से संस्कृत के अध्ययन के साथ-साथ इसके प्रचार-प्रसार में भी सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सभी को निरंतर प्रयास करने चाहिए।
कार्यक्रम में प्रो. जया तिवारी, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. सुषमा जोशी, डॉ. मनोज, डॉ. संदीप, भावना राणा, जगदीश, हर्षित जोशी, दीपक पाण्डेय, हिमांशु, काजल, प्रमोद एवं मीनाक्षी सहित विभाग के शिक्षक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
संस्कृत सप्ताह के तहत आयोजित इन गतिविधियों से विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ-साथ उनकी रचनात्मक एवं अभिव्यक्ति क्षमता को भी प्रोत्साहन मिला।










