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उत्तराखंड के अम्बेडकर कहे जाने वाले मुंशी हरिप्रसाद टम्टा की 139वीं जयंती आज समाज सुधार, शिक्षा और दलित उत्थान के लिए जीवनभर किया संघर्ष
हल्द्वानी। उत्तराखंड में सामाजिक न्याय, शिक्षा और दलित उत्थान के लिए जीवनभर संघर्ष करने वाले महान समाज सुधारक मुंशी हरिप्रसाद टम्टा की 139वीं जयंती पर बुधवार को उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और समाज के लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके सामाजिक योगदान को स्मरण किया।

वक्ताओं ने कहा कि मुंशी हरिप्रसाद टम्टा ने ऐसे दौर में सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और असमानता के खिलाफ आवाज उठाई, जब समाज के वंचित और दलित वर्गों को शिक्षा, सम्मान और समान अवसरों से दूर रखा जाता था। उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करते हुए शिक्षा को सामाजिक बदलाव का सबसे मजबूत माध्यम बनाया।
मुंशी हरिप्रसाद टम्टा ने समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों को संगठित करने के साथ ही उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझाते हुए समाज के लोगों को आगे बढ़ने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया। सामाजिक समानता के लिए उनके योगदान के कारण उन्हें कुमाऊं का अम्बेडकर भी कहा जाता है।

जयंती समारोह में वक्ताओं ने कहा कि मुंशी हरिप्रसाद टम्टा का संघर्ष केवल एक वर्ग विशेष तक सीमित नहीं था, बल्कि उनका उद्देश्य समाज में समानता, सम्मान और न्याय की स्थापना करना था। उन्होंने शिक्षा और संगठन के माध्यम से वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया।
वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में भी उनके विचार उतने ही प्रासंगिक हैं। समाज में समानता और सामाजिक न्याय को मजबूत करने के लिए शिक्षा का प्रसार तथा लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना जरूरी है। मुंशी हरिप्रसाद टम्टा का जीवन नई पीढ़ी को संघर्ष, सामाजिक एकजुटता और शिक्षा के महत्व की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर लोगों ने संकल्प लिया कि मुंशी हरिप्रसाद टम्टा के विचारों और उनके सामाजिक सरोकारों को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही शिक्षा, समानता और सामाजिक सम्मान के लिए उनके बताए मार्ग पर आगे बढ़ते हुए समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों की आवाज को मजबूत किया जाएगा।

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