सरोवर नगरी नैनीताल में इन दिनों रामलीला की धूम मची हुई है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में रामलीला का मंचन किया जा रहा है, लेकिन मल्लीताल बाजार की रामलीला का आकर्षण कुछ अलग ही है। एक ओर जहां समय के साथ कई स्थानों पर रामलीला के प्रति लोगों का उत्साह कम होता दिखाई दे रहा है, वहीं मल्लीताल बाजार में आयोजित रामलीला में कलाकारों के अभिनय को देखने के लिए हजारों की संख्या में दर्शक जुट रहे हैं। खासतौर पर मेघनाद के किरदार में मिथिलेश पांडे का दमदार अभिनय दर्शकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

राम सेवक सभा की ओर से आयोजित मल्लीताल बाजार की रामलीला में मिथिलेश पांडे पिछले 43 वर्षों से मेघनाद की भूमिका निभा रहे हैं। अपने प्रभावशाली संवाद, शानदार अभिनय और पात्र के अनुरूप भाव-भंगिमाओं से वह हर वर्ष दर्शकों का दिल जीत रहे हैं। रामलीला के मंच पर उनके अभिनय को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। वर्षों से एक ही किरदार को पूरी निष्ठा और मेहनत के साथ निभाना उनकी कला, अनुभव और रामलीला के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

53 वर्षों से रामलीला और अभिनय की दुनिया से जुड़ाव

मिथिलेश पांडे ने बताया कि रामलीला से उनका जुड़ाव कई दशकों पुराना है। वह पिछले 53 वर्षों से रामलीला के मंचन और अभिनय की परंपरा से जुड़े हुए हैं। बचपन में उन्होंने रामलीला में बंदर और राक्षस जैसे छोटे-छोटे किरदार निभाने शुरू किए थे। धीरे-धीरे अभिनय के प्रति उनकी रुचि बढ़ती गई और उन्होंने विभिन्न भूमिकाओं के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई। आज मेघनाद के किरदार में उनका अभिनय मल्लीताल की रामलीला की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हो चुका है।

उनका कहना है कि आज की पीढ़ी को रामलीला के पात्रों और उनसे मिलने वाली सीख को समझना चाहिए। रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन में सही और गलत के बीच अंतर समझने तथा अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा भी देती है। युवाओं को इससे सीख लेकर गलत मार्ग का त्याग करना चाहिए।

स्वर्गीय निर्मल पांडे की अभिनय यात्रा से भी जुड़ा है परिवार

मिथिलेश पांडे ने अपने परिवार की अभिनय परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके दिवंगत भाई निर्मल पांडे भी अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान रखते थे। उन्होंने बताया कि उनके भाई ने वर्ष 1971-72 के आसपास रामलीला में राक्षस और बंदर के किरदार निभाए थे। इसके बाद उन्होंने सीआरएसटी इंटर कॉलेज से वर्ष 1976 में नाटकों में अभिनय करना शुरू किया।

मेकअप करने वाले, वेशभूषा तैयार करने वाले, मंच सजाने वाले और अन्य व्यवस्थाओं में जुटे लोग रामलीला को जीवंत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इन लोगों के सहयोग के बिना रामलीला का मंचन अधूरा है।

उन्होंने बताया कि बच्चों को रामलीला के लिए लगभग तीन महीने से प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे संवादों को अच्छी तरह याद कर सकें और दर्शकों के सामने प्रभावशाली अभिनय प्रस्तुत कर सकें। इस प्रशिक्षण के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपनी संस्कृति एवं परंपराओं से भी जुड़ते हैं।

परंपरा, संस्कृति और अभिनय का संगम है मल्लीताल की रामलीला

मल्लीताल बाजार की रामलीला में मिथिलेश पांडे का अभिनय इस बात का उदाहरण है कि समर्पण, निरंतर अभ्यास और अपनी कला के प्रति लगाव किसी भी परंपरा को लंबे समय तक जीवंत बनाए रख सकता है। 43 वर्षों से मेघनाद की भूमिका निभाकर वह न केवल दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, रंगमंच और अनुशासन से जुड़ने की प्रेरणा भी दे रहे हैं।

नैनीताल की इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक परंपरा में कलाकारों के साथ-साथ पर्दे के पीछे काम करने वाले लोगों की मेहनत भी महत्वपूर्ण है। यही सामूहिक प्रयास मल्लीताल बाजार की रामलीला को विशेष पहचान दे रहा है और दर्शकों को हर वर्ष इसकी ओर आकर्षित कर रहा है।

मेकअप करने वाले, वेशभूषा तैयार करने वाले, मंच सजाने वाले और अन्य व्यवस्थाओं में जुटे लोग रामलीला को जीवंत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इन लोगों के सहयोग के बिना रामलीला का मंचन अधूरा है।
उन्होंने बताया कि बच्चों को रामलीला के लिए लगभग तीन महीने से प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे संवादों को अच्छी तरह याद कर सकें और दर्शकों के सामने प्रभावशाली अभिनय प्रस्तुत कर सकें। इस प्रशिक्षण के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपनी संस्कृति एवं परंपराओं से भी जुड़ते हैं।
परंपरा, संस्कृति और अभिनय का संगम है मल्लीताल की रामलीला
मल्लीताल बाजार की रामलीला में मिथिलेश पांडे का अभिनय इस बात का उदाहरण है कि समर्पण, निरंतर अभ्यास और अपनी कला के प्रति लगाव किसी भी परंपरा को लंबे समय तक जीवंत बनाए रख सकता है। 43 वर्षों से मेघनाद की भूमिका निभाकर वह न केवल दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, रंगमंच और अनुशासन से जुड़ने की प्रेरणा भी दे रहे हैं।
नैनीताल की इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक परंपरा में कलाकारों के साथ-साथ पर्दे के पीछे काम करने वाले लोगों की मेहनत भी महत्वपूर्ण है। यही सामूहिक प्रयास मल्लीताल बाजार की रामलीला को विशेष पहचान दे रहा है और दर्शकों को हर वर्ष इसकी ओर आकर्षित कर रहा है।

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