इलाज का खर्च न उठा पाने की बात कहकर बच्ची को छोड़ने का आरोप, गंभीर हालत में हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में कराया गया था भर्ती

रुद्रपुर। उत्तराखंड के रुद्रपुर में मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। जिस नवजात बच्ची ने अभी दुनिया में ठीक से आंखें भी नहीं खोली थीं और जिसे जिंदगी की शुरुआत में अपनों के स्नेह और देखभाल की सबसे अधिक जरूरत थी, उसे कथित तौर पर उसके अपने ही बेसहारा छोड़ गए। सिंह कॉलोनी स्थित सेंट ऑन चर्च के पास खड़ी एक कार के नीचे कपड़े में लिपटी मिली नवजात बच्ची की इलाज के दौरान मौत हो गई। मामले की जांच के बाद पुलिस ने बच्ची की मां, नानी और एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने बच्ची के बीमार होने और इलाज का खर्च वहन नहीं कर पाने की बात कही है।

इस घटना ने एक बार फिर नवजात शिशुओं की सुरक्षा और संकट की स्थिति में परिवारों को मिलने वाली सहायता जैसे गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कार के नीचे कपड़े में लिपटी मिली थी बच्ची

पुलिस के मुताबिक, अक्टूबर में सिंह कॉलोनी की एक गली में चर्च रोड के पास खड़ी कार के नीचे कपड़े में लिपटी नवजात बच्ची मिलने की सूचना आपातकालीन सेवा 112 पर दी गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बच्ची को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया।

अस्पताल में चिकित्सकों ने बच्ची की गंभीर हालत को देखते हुए उसे नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भर्ती कर उपचार शुरू किया। उसकी स्थिति में गंभीरता को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए उसे हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर कर दिया गया। चिकित्सकों ने बच्ची को बचाने का प्रयास किया, लेकिन जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही मासूम ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

जन्म के अगले दिन अस्पताल से मिली थी छुट्टी

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि बच्ची का जन्म अक्टूबर की एक रात बिलासपुर स्थित अस्पताल में हुआ था। बच्ची के बाएं हाथ में कैन्युला लगा हुआ था और नाभि पर क्लिप लगी थी। इससे स्पष्ट हुआ कि जन्म के बाद उसे चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत थी।

पुलिस के अनुसार, 17 अक्टूबर को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद बच्ची को घर ले जाकर उसकी देखभाल करने के बजाय कथित तौर पर चर्च के पास छोड़ दिया गया। इसके बाद बच्ची कार के नीचे कपड़े में लिपटी मिली। समय रहते उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

इलाज का खर्च अधिक होने की बात कही

सीओ सिटी के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि बच्ची बीमार थी और चिकित्सक ने उसके उपचार पर काफी खर्च आने की बात कही थी। आरोपियों ने दावा किया कि उनके पास इलाज कराने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे।

पुलिस के मुताबिक, दोनों महिलाएं मुनीश पाल की मोटरसाइकिल से बच्ची को चर्च के पास ले गई थीं और वहां छोड़कर चली गईं। हालांकि, मामले में आरोपियों के बयानों और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है।

मासूम की मौत से उठे कई सवाल
इस घटना ने समाज और व्यवस्था के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आर्थिक तंगी और इलाज का खर्च किसी परिवार के लिए बड़ी चुनौती हो सकता है, लेकिन किसी नवजात को असुरक्षित हालत में छोड़ देना उसकी जान के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
यदि किसी परिवार के सामने नवजात के इलाज का खर्च उठाने में परेशानी आती है, तो अस्पताल प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और संबंधित सरकारी सहायता सेवाओं से मदद मांगी जा सकती है। वहीं, किसी नवजात को असुरक्षित स्थान पर छोड़ने के बजाय पुलिस या बाल संरक्षण तंत्र को सूचना देकर उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
फिलहाल, रुद्रपुर पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। जिंदगी की शुरुआत में ही दुनिया से विदा हो गई इस मासूम की मौत ने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है।

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