भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर चेतावनी, किसान हित प्रभावित हुए तो देशव्यापी आंदोलन
19 नवंबर को उत्तराखण्ड में देश बचाओ मोर्चा की बैठक
– 20 से अधिक राज्यों के प्रतिनिधियों को बुलाने की तैयारी
एमएसपी की कानूनी गारंटी और किसानों की कर्जमुक्ति की उठाई मांग, समझौते के विरोध में देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
हल्द्वानी। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर किसान मंच उत्तराखण्ड ने केंद्र सरकार से कृषि, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष कार्तिक उपाध्याय ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी दबाव में किसानों के हितों के खिलाफ किसी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, तो इसके विरोध में देशव्यापी आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते में भारतीय किसानों, पशुपालकों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
हल्द्वानी में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान कार्तिक उपाध्याय ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की शर्तों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि किसानों और आम जनता को इसके संभावित प्रभावों की स्पष्ट जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि समझौते के तहत कृषि उत्पादों के आयात, आयात शुल्क में संभावित रियायतों और अन्य व्यापारिक प्रावधानों का भारतीय कृषि व्यवस्था पर पड़ने वाला प्रभाव स्पष्ट किया जाना आवश्यक है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी निर्णय से देश के किसानों की आजीविका, घरेलू कृषि बाजार और पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र पर प्रतिकूल असर न पड़े।
उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था और करोड़ों परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर निर्णय लेते समय छोटे और सीमांत किसानों, पशुपालकों तथा दुग्ध उत्पादकों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि व्यापार समझौते से संबंधित सभी महत्वपूर्ण शर्तों और संभावित प्रभावों पर पारदर्शिता बरती जाए तथा किसानों के हितों को ध्यान में रखकर ही आगे की कार्रवाई की जाए।
एमएसपी की कानूनी गारंटी और कर्जमुक्ति की मांग
प्रेसवार्ता में कार्तिक उपाध्याय ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, किसानों की कर्जमुक्ति और मजदूरों के अधिकारों को प्रमुख मुद्दा बताते हुए कहा कि किसानों और श्रमिकों की समस्याओं का समाधान किए बिना कृषि क्षेत्र को मजबूत नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए और उन्हें आर्थिक संकट से उबारने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। साथ ही मजदूरों के अधिकारों और आजीविका की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
देश बचाओ मोर्चा से 100 से अधिक संगठन जुड़े
कार्तिक उपाध्याय के अनुसार, देश बचाओ मोर्चा से अब तक 100 से अधिक किसान, मजदूर और सामाजिक संगठन जुड़ चुके हैं। उन्होंने बताया कि मोर्चा विभिन्न जनसरोकारों से जुड़े संगठनों को एक साझा मंच पर लाकर किसानों, पशुपालकों, युवाओं और मजदूरों की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की दिशा में काम कर रहा है। उनका कहना है कि विभिन्न संगठनों के बीच समन्वय स्थापित कर जनहित के मुद्दों पर साझा आवाज बुलंद करना समय की आवश्यकता है।
19 नवंबर को उत्तराखण्ड में होगी महत्वपूर्ण बैठक
उन्होंने बताया कि देश बचाओ मोर्चा की अगली महत्वपूर्ण बैठक 19 नवंबर 2026 को उत्तराखण्ड में आयोजित करने की योजना है। इस बैठक में 20 से अधिक राज्यों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। बैठक के आयोजन के लिए देहरादून और हरिद्वार में से किसी एक स्थान का चयन किया जाना है।
उपाध्याय ने कहा कि बैठक में उत्तराखण्ड के विभिन्न जनआंदोलनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, राष्ट्रीय स्तर पर साझा रणनीति तैयार करने और किसानों, पशुपालकों, युवाओं तथा मजदूरों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाने पर चर्चा की जाएगी।
उन्होंने कहा कि देश बचाओ मोर्चा का उद्देश्य विभिन्न जनसंगठनों को एकजुट कर जनहित से जुड़े सवालों पर व्यापक अभियान चलाना है। कार्तिक उपाध्याय ने दोहराया कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े लोगों के हितों की रक्षा के लिए संगठन लगातार आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर किसानों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाए और किसी भी निर्णय से पहले उनके हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

