चीड़ के पेड़ों पर लगे लीसे को लेकर वन विभाग लापरवाह। लीसे के ठेकेदार हों रहें मालामाल
रिपोर्ट- बलवन्त सिंह रावत
रानीखेत। अल्मोड़ा जिले के विकासखण्ड ताड़ीखेत मे इन दिनो रिजर्व, वन पंचायत व नाप भूमि मे चीड़ के पेड़ो पर लीसा लगाया गया है। वही चीड़ के पेड़ों पर लगें चार-चार गमलों को देखकर यह लगता है कि वन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ मिलकर लीसे के ठेकेदार मनमानी तरह से लीसा निकालकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं, और यह सब काम वन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के सामने हो रहा है।
बता दे कि इस बार चीड़ के जंगलो मे लीसा रिजर्व, वन पंचायत व नाप भूमि मे लगाया गया है। वही लीसा ठेकेदारो द्वारा मनमानी तरह से चीड़ के पेडो पर मानक के विपरीत चार-चार घाव लगाकर लीसा निकाला जा रहा है।
अब देखने वाली बात यह है कि कब तक वन विभाग के अधिकारी उन ठेकेदारो पर कार्रवाई करते हैं, जिन्होंने मानक के विपरीत एक पेड़ पर चार-चार घाव लगा रखे है।
वनक्षेत्राधिकारी तापश मिश्रा ने बताया कि हर वर्ष की तरह जब लीसे का काम शुरू किया जाता है, तब एक लीसा विद्धवाहन नियमावली बनाई जाती है।
इस साल भी रिजर्व, वन पंचायत व नाप भूमि के क्षेत्रों में जहा भी लीसा लगाया गया है, वहा सभी कर्मचारियों व ठेकेदारो को नियमावली समझा दी गई है, और मानक के अनुरूप काम करने के निर्देश दिए हैं।
नियमावली के अनुसार 40 सेन्टीमीटर से कम मोटे पेड़ों पर गमला नही लगाया जाएगा, और एक पेड़ पर सिर्फ एक ही गमला लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि रिजर्व, वन पंचायत व नाप भूमि पर यदि कोई भी ठेकेदार या कर्मचारी मानक के अनुरूप कार्य नही करते पाये गये, तो उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार उन्हे एक नोटिस भेजा जाएगा।
अगर फिर भी कोई नियमानुसार कार्य करने में असमर्थता जताते है, तो उनके खिलाफ कार्रवाही की जाएगी, और जुर्माने का धन राजस्व में जमा किया जाएगा।





