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दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने का असर प्रदूषण रहित सरोवरनगरी नैनीताल के पर्यटन पर पड़ रहा है। यहां सर्दियों के पूरे मौसम में पिछले वर्षों में जितने सैलानी कुल मिलाकर पहुंचते थे, उतने नवंबर माह के पहले पखवाड़े में ही पहुंच चुके हैं और आगे क्रिसमस और नये वर्ष के स्वागत के बड़े मौके शेष हैं जब और भी अधिक सैलानियों के पहुंचने की पूरी संभावना है।

सामान्यतया पर्यटन नगरी नैनीताल में सर्दियों के दिनों को पर्यटन की भाषा में ‘ऑफ सीजन’ कहा जाता है। लेकिन हालिया वर्षों में यह स्थिति कुछ हद तक बदलती नजर आयी है। खासकर इस वर्ष की बात करें तो नवंबर माह में नगर में होटल मिलना मुश्किल हो रहा है।

नगर में स्थित राज्य अतिथि गृह-नैनीताल क्लब भी पिछले दो दिनों से पूरी तरह से बुक है। नगर में सैलानी उमड़े हुए हैं। हर ओर खिली धूप के बीच सैलानियों की चहल-पहल, मस्ती बिखरी नजर आती है। नैनी झील में सैलानी जमकर नौकायन कर रहे हैं और रोपवे केबल कार, चिड़ियाघर और केव गार्डन के साथ हिमालय दर्शन, स्नोव्यू, नैना पीक, लवर्स प्वाइंट व लैंड्स इंड आदि स्थलों की भी सैर कर रहे हैं।

दीपावली के बाद से नगर के लगभग सभी होटल और रिसॉर्ट पूरी तरह से पैक हो चुके हैं। बताया जा रहा है कि दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के महानगरों की जहरीली हवा से बचने के लिए बड़ी संख्या में लोग नैनीताल का रुख कर रहे हैं।

शनिवार को नगर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भारी भीड़ देखी गई, जिससे स्थानीय कारोबारियों में उत्साह है। मॉल रोड पर पर्यटकों की चहल-पहल, भोटिया और तिब्बती बाजार में खरीदारी करते सैलानियों का जोश देखते ही बन रहा था। स्नो व्यू, चिड़ियाघर, केव गार्डन, हिमालय दर्शन और वाटरफॉल जैसे स्थानों पर भी दिन भर रौनक रही। वहीं नौकायन और हनुमानगढ़ी में सूर्यास्त का आनंद लेने वाले सैलानियों की भी अच्छी संख्या रही।

सुहावन मौसम साफ स्वच्छ वातावरण

एक ओर जहां दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर पीएम 2.5 इंडेक्स पर 300 से 400 के स्तर तक बढ़ गया है, जिसमें सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है, वहीं स्थानीय एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के अनुसार नैनीताल में वायु प्रदूषण का स्तर मात्र 30 यानी दिल्ली के प्रदूषण के सबसे बेहतर स्तर से भी 10 गुना बेहतर है।

जबकि दीपावली के दौरान यहां पीएम 2.5 इंडेक्स 60 से अधिक था। एरीज के वैज्ञानिक ब्रजेश कुमार ने बताया कि पीएम 2.5 वायुमंडल में उपस्थित 2.5 माइक्रॉन से छोटे आकार के धूल के कणों के घनत्व को बताता है। सर्दियों के मौसम में तापमान गिरने व आर्द्रता बढ़ने से धूल के यह कण नमी की बूंदों के साथ मिलकर सांद्र हो जाते हैं और धूप आने पर भी नहीं हटते। इनके हटने का एक मात्र तरीका बारिश होती है।

नैनीताल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय बिष्ट ने बताया कि नगर में नवंबर माह में 30 प्रतिशत पर्यटन बढ़ा है। इससे सर्दियों के मौसम में होने वाला कुछ पर्यटन आधे नवंबर माह में ही हो गया है। पूर्व में गुजरातियों के बाद इन दिनों दिल्ली एवं एनसीआर के सैलानी ही अधिक आ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि कई कंपनियां कार्यालय बुलाने की जगह ‘वर्क फ्रॉम होम’ यानी घर से काम करने की इजाजत भी दे रही हैं। इस कारण भी सैलानी पहाड़ों की सैर पर आ रहे हैं और इसका लाभ नैनीताल और पहाड़ों के पर्यटन को मिल रहा है।

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