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उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की स्नातक स्तरीय परीक्षा के प्रश्नपत्र के तीन पन्ने लीक होने के मामले में पुलिस ने मंगलवार को एक आरोपी साबिया को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि हरिद्वार के लक्सर की निवासी साबिया (35), परीक्षा में अभ्यर्थी के तौर पर शामिल हुए मुख्य आरोपी खालिद मलिक की बहन है।

रविवार को प्रदेशभर में विभिन्न विभागों के लिए आयोजित इस परीक्षा के प्रश्नपत्र के तीन पन्ने सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे, जिससे हड़कंप मच गया था।

मामले की विवेचना अधिकारी और ऋषिकेश की पुलिस अधीक्षक जया बलूनी ने बताया कि जांच में मिले साक्ष्यों से स्पष्ट है कि खालिद, हरिद्वार के पथरी क्षेत्र में स्थित आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज में बनाए गए परीक्षा केंद्र में किसी तरह का उपकरण लेकर गया था, जिससे उसने प्रश्नपत्र के तीन पन्नों की फोटो खींचकर अपने मोबाइल फोन पर भेजी जो साबिया के पास था।

उन्होंने बताया कि साबिया ने खालिद के फोन से ये प्रश्न टिहरी में सहायक प्रोफेसर सुमन के फोन पर भेजे और उनसे उत्तर प्राप्त किए।

बलूनी ने कहा, ”साबिया ने खालिद को परीक्षा में नकल कराने के उद्देश्य से सुमन को प्रश्नपत्र की फोटो भेजी और उत्तर हासिल किए। इसलिए प्रकरण में उसकी भूमिका को देखते हुए उसे गिरफ्तार किया गया है।”

उन्होंने यह भी बताया कि हालांकि, प्रश्नपत्र की फोटो लेकर परीक्षा केंद्र से बाहर भेजने वाला खालिद अभी पुलिस गिरफ्त में नहीं आया है और उसकी तलाश की जा रही है।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि सुमन से पूछताछ में खालिद की एक अन्य बहन हिना की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिसकी जांच की जा रही है।

इस प्रकरण में चार नामजद और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ रायपुर थाना क्षेत्र में उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम एवं निवारण) अध्यादेश 2023 की प्रासंगिक धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

बलूनी ने बताया कि सोमवार को परीक्षा केंद्र का निरीक्षण किया गया और वहां उपस्थित प्रधानाचार्य, परीक्षा कक्ष निरीक्षक तथा जैमर लगाने वालों से गहन पूछताछ की गई।

आयोग द्वारा 21 सितंबर को आयोजित स्नातक स्तरीय प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्नपत्र के तीन पन्नों की फोटो के ‘स्क्रीनशॉट’ सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिनमें फोटो लिए जाने का समय परीक्षा शुरू होने के कुछ ही देर बाद का दिखाई दे रहा था।

इस पर आयोग के अध्यक्ष गणेश सिंह मर्तोलिया ने भी हैरानी जताई कि परीक्षा केंद्रों पर जैमर लगाए जाने के बावजूद प्रश्नपत्र बाहर कैसे आया। इस घटना पर मचे हड़कंप के बाद आयोग ने देहरादून पुलिस को एक शिकायती पत्र सौंपते हुए मामले की विस्तृत जांच का अनुरोध किया।

अधिकारियों ने बताया कि जांच में पता चला कि ये फोटो सुमन के मोबाइल से भेजी गई थीं।

उन्होंने कहा, ”पूछताछ में सुमन ने बताया कि साबिया को उत्तर देने के बाद उन्हें इन प्रश्नों पर शक हुआ, जिसके बाद उन्होंने प्रश्नों के स्क्रीनशॉट लेकर एक अन्य व्यक्ति को दिखाया। उसी व्यक्ति ने स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए।”

सुमन से पूछताछ के आधार पर उन सभी व्यक्तियों की जांच की जा रही है, जिन्होंने प्रश्नपत्र लीक की सूचना पुलिस या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी को देने के बजाय परीक्षा के बाद उसके ‘स्क्रीनशॉट’ सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए।

बलूनी ने बताया कि यदि उक्त व्यक्तियों द्वारा समय रहते इस संबंध में जानकारी आयोग, पुलिस या अन्य प्राधिकारी को दे दी गई होती तो संभवतः खालिद और उसके अन्य सहयोगी परीक्षा केंद्र से ही पकड़े जा सकते थे।

इस बीच, आयोग के सचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने स्पष्ट किया है कि चूंकि यह मामला केवल एक परीक्षा केंद्र और एक अभ्यर्थी से जुड़ा है, इसलिए परीक्षा रद्द नहीं की जाएगी।

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