उत्तराखंड में लगातार दूसरे दिन भालू ने स्कूल जा रही दो छात्राओं पर हमला कर दिया. यह घटना सुबह करीब 10 बजे राजकीय बालिका इंटर कॉलेज गोपेश्वर के पास हुई, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।

हमले के दौरान एक छात्रा ने फुर्ती दिखाते हुए मौके से भागकर जान बचा ली, जबकि दूसरी छात्रा गिरकर बेहोश हो गई. दोनों घायल छात्राओं को 108 एम्बुलेंस की मदद से जिला अस्पताल गोपेश्वर लाया गया, जहां डॉक्टरों के अनुसार दोनों की हालत फिलहाल स्थिर है।

सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि जहां भालू ने हमला किया, वहां से वन विभाग (DFO) कार्यालय की दूरी महज 400 मीटर है. बावजूद इसके क्षेत्र में भालू की गतिविधियों को रोकने में वन विभाग अब तक नाकाम नजर आ रहा है।

स्कूल के शिक्षक ललित मोहन बिष्ट की मानें तो छात्रा राधिका रावत स्कूल आ रही थी. तभी उसने स्कूल के नीचे भालू को देखा. जान बचाने के प्रयास में वह दौड़ी, लेकिन गिरने से चोटिल हो गई।

वहीं दूसरी छात्रा सीमा, राधिका की हालत देखकर घबराकर स्कूल परिसर में ही बेहोश हो गई. सूचना मिलते ही स्कूल प्रशासन ने दोनों छात्राओं को तत्काल अस्पताल भिजवाया।

स्थानीय लोगों और स्कूल प्रशासन का आरोप है कि इससे पहले भी स्कूल के आसपास भालू की गतिविधियां देखी गई थीं, जिसकी जानकारी वन विभाग और शिक्षा विभाग को दी गई थी।

बावजूद इसके न तो नियमित गश्त बढ़ाई गई और न ही सुरक्षा के ठोस इंतजाम किए गए. घटना के बाद अभिभावकों में गुस्सा है. उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो बच्चों की जान खतरे में नहीं पड़ती।

वन विभाग के क्षेत्राधिकारी गोपेश्वर पंकज कुमार गोड़ ने कहा कि सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और आसपास के क्षेत्रों में गश्त की गई. उन्होंने दावा किया कि अब इलाके में लगातार निगरानी और गश्त बढ़ाई जाएगी, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा ना हों।

सोमवार को भी चमोली में दो भालुओं ने एक स्कूल के 12 बच्चों पर हमला कर दिया था. भालू छठी कक्षा के छात्र आरव को उठाकर जंगल की ओर ले गया था. इसी दौरान कक्षा 8 की छात्रा दिव्या ने साहस दिखाते हुए भालू के पीछे दौड़ लगाई और पत्थर दिखाकर उसे भगाया, जिससे बच्चे की जान बच सकी।

मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही निर्देश दे चुके हैं कि ऐसी किसी भी घटना की सूचना मिलने पर 30 मिनट के भीतर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचे।

लेकिन चमोली की घटनाएं इन निर्देशों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही हैं. भालू के लगातार हमलों से क्षेत्र में भय का माहौल है. अभिभावक और स्थानीय लोग स्कूलों के आसपास स्थायी सुरक्षा व्यवस्था, पिंजरे लगाने और वन विभाग की 24×7 गश्त की मांग कर रहे हैं।

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