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मकर संक्रांति पर आस्था का महासंगम: कड़ाके की ठंड में भी गंगा घाटों पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

हरिद्वार। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर बुधवार को देश के विभिन्न प्रांतों से आए करीब पांच लाख श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया और मोक्ष की कामना की।

घना कोहरा और कड़ाके की ठंड भी श्रद्धालुओं की श्रद्धा को डिगा नहीं सकी—आस्था के सामने ठंड बौनी नजर आई।

भोर से शाम तक चला स्नान का सिलसिला

भोर सुबह से ही गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। घने कोहरे के बीच श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान, दान-पुण्य कर सुख-समृद्धि की कामना की। स्नान का क्रम शाम तक अनवरत जारी रहा।

प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था

स्नान पर्व को सकुशल संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने पुख्ता इंतजाम किए थे।

मेला क्षेत्र को 8 जोन और 22 सेक्टर में बांटा गया।

प्रत्येक जोन व सेक्टर में जोनल ऑफिसर और सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात रहे।

पर्याप्त पुलिस बल के साथ पीएसी, डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ता सक्रिय रहा।

सीसीटीवी निगरानी, घाटों पर गोताखोर और जल पुलिस मुस्तैद रहे।

आपात स्थितियों के लिए चिकित्सा शिविर, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की व्यवस्था की गई।

एसएसपी का बयान

जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने बताया कि मकर संक्रांति स्नान पर्व पूरे धार्मिक वातावरण में शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। सायं आरती दर्शन तक लगभग 4 लाख 90 हजार श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी एवं अन्य घाटों पर स्नान किया।

धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में मकर संक्रांति पर गंगा स्नान के बाद देव दर्शन, खिचड़ी, गुड़-तिल से बनी मिठाइयों और गरम वस्तुओं के दान का विशेष महत्व है, जिसका श्रद्धालुओं ने श्रद्धा से पालन किया।

इस दिन सूर्य देव धनु से मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण होते हैं, इसलिए इसे उत्तरायणी पर्व भी कहा जाता है। मान्यता है कि गंगा स्नान और सूर्य को जल अर्पित करने से मनोकामनाएं सिद्ध होती हैं।

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