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भवाली। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (बीपीएचयू) में लाखों रुपये खर्च कर स्थापित की गई अत्याधुनिक जांच मशीनें मरीजों के काम नहीं आ पा रही हैं।

करीब 82 लाख रुपये की मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद स्टाफ और आवश्यक केमिकल की कमी के कारण लैब में जांच का काम लंबे समय से प्रभावित है। ऐसे में क्षेत्र के मरीजों को सामान्य से लेकर महत्वपूर्ण जांचों के लिए निजी पैथोलॉजी सेंटरों या अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।

बीपीएचयू में फुली ऑटोमेटिक बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर, ईएसआर एनालाइजर और हेमेटोलॉजी सेल काउंटर समेत कई अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की गई हैं।

इन मशीनों के जरिए मरीजों की शुगर, लिपिड प्रोफाइल, लिवर, किडनी और रक्त से संबंधित कई महत्वपूर्ण जांचें की जा सकती हैं। बताया गया कि वर्ष 2023 में बीपीएचयू में इन मशीनों को स्थापित किया गया था, ताकि स्थानीय स्तर पर लोगों को बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य जांच की सुविधा मिल सके।

लेकिन मशीनें स्थापित होने के बाद भी इनके नियमित संचालन के लिए जरूरी मानव संसाधन और सामग्री उपलब्ध नहीं हो सकी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यूनिट के संचालन के लिए एक पैथोलॉजिस्ट, चार लैब टेक्नीशियन, एक डाटा एंट्री ऑपरेटर और एक अटेंडेंट की आवश्यकता है। पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं होने के कारण अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग नहीं हो पा रहा है।

इसके अलावा जांच के लिए जरूरी केमिकल और अन्य उपभोग्य सामग्री की भी कमी बनी हुई है। संसाधनों के अभाव में मशीनें बंद पड़ी हैं और सरकारी स्तर पर जांच की सुविधा का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।

47 लाख से बने भवन में भी सीलन

बीपीएचयू के लिए करीब 47 लाख रुपये की लागत से भवन तैयार किया गया है, लेकिन बारिश के दौरान भवन भी सीलन की समस्या से जूझ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर लाखों रुपये खर्च कर अत्याधुनिक मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं, वहीं दूसरी ओर उनके संचालन के लिए जरूरी स्टाफ और सामग्री की व्यवस्था नहीं होने से सरकारी निवेश का अपेक्षित लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा है।

निजी केंद्रों का रुख करने को मजबूर मरीज

क्षेत्रवासियों का कहना है कि बीपीएचयू में जांच की सुविधा शुरू होने से आसपास के लोगों को काफी राहत मिलने की उम्मीद थी। खासकर गरीब और दूरदराज के मरीजों को महंगी जांच के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। मगर मशीनें बंद होने के कारण मरीजों को निजी पैथोलॉजी केंद्रों में जांच करानी पड़ रही है। इससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि बीपीएचयू में जल्द से जल्द पर्याप्त स्टाफ की तैनाती के साथ आवश्यक केमिकल और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि लाखों रुपये की लागत से स्थापित मशीनों का संचालन शुरू हो सके और मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में ही जांच की सुविधा मिल सके।

उच्च अधिकारियों को भेजे गए पत्र

प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रमेश कुमार ने बताया कि स्टाफ और केमिकल की कमी के कारण मशीनें लंबे समय से बंद हैं। वर्ष 2023 में यूनिट का निर्माण और मशीनों की स्थापना की गई थी।

आवश्यक स्टाफ एवं अन्य संसाधनों की व्यवस्था के लिए उच्च अधिकारियों को कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं। संसाधन उपलब्ध होते ही जांच व्यवस्था को सुचारु करने का प्रयास किया जाएगा।

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