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जंगली जानवरों व समय पर बारिश न होने के कारण फसल बर्बाद, दाने-दाने को मोहताज ग्रामीण

भीमताल विधायक व सांसद पर क्षेत्र की अनदेखी का आरोप

स्थानीय जन प्रतिनिधियों पर भी लगाया क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप

ग्राम प्रधान, बीडीसी मेंबर, जिलापंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख, व विधायक केवल पहाड़ आते हैं चुनाव लड़ने, 

अधिकतर प्रतिनिधि परिवार सहित हल्द्वानी में कर रहे हैं मौज

भीमताल। पहाड़ों के किसानो ने जंगली जानवरों व समय पर बारिश न होने के कारण फसल बर्बाद होने व दाने-दाने को मजबूर होने पर पहाड़ों से पलायन का मन बना लिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार पहाड़ के किसानों का कोई ध्यान नहीं रख रही है। लोग दाने-दाने को मोहताज हैं।

पहाड़ के किसानों ने अन्य राज्यों में कृषि ऋण माफ की जाने की तरह उत्तराखंड के किसानों का लोन माफ करने की मांग की।

वहीं किसानों का कहना है कि आचार संहिता के बाद उन्होंने उग्र आंदोलन का मन बना लिया है।

कहा की सरकार की अनदेखी के कारण पहाड़ वीरान होते जा रहे हैं।

पहाड़ के किसानों ने भीमताल विधायक व सांसद पर क्षेत्र की अनदेखी का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि विधायक और सांसद केवल वोट के लिए ही भीमताल विधानसभा की दुरुस्त ब्लॉक ओखल कांडा का भ्रमण करते हैं चुनाव जीतने की बात ग्रामीणों को भूल जाते हैं सांसद और विधायक अपने घरों को भरने में लगे हैं उन्होंने हल्द्वानी में कोठियां कर खड़ी कर ली।

 ग्रामीणों ने विधायक व सांसद पर केवल अपने घर का विकास करने का आरोप लगाया उन्होंने चेतावनी दी यदि शीघ्र ही सरकार ने पहाड़ के किसानों का ध्यान नहीं दिया और कर्ज माफ नहीं किया गया तो वह उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे।

 ग्रामीणों का कहना है की सरकारों की नाकामी के कारण ही पहाड़ों में जंगली सुअरो और बंदरों का आतंक है।

अगर समय रहते जंगली सुअरों और बंदरों को पकड़ने के लिए टीमों को गठित किया गया होता तो पहाड़ों की दशा सुधर सकती थी ।

लेकिन विधायक और सांसद केवल अपने घर का विकास और अपने बच्चों के तक ही सीमित हैं।

उन्हें क्षेत्र के विकास और पहाड़ के किसानों की समस्याओं की कोई परवाह नहीं है। ऐसे में अब किसानों ने चुनाव के बाद उग्र आंदोलन का मन बनाया है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार अन्य पहाड़ी राज्यों की तरह उत्तराखंड के किसानों का ऋण माफ नहीं करती है तो वह सड़क पर धरना प्रदर्शन को मजबूर होंगे।

 वही ग्राम सभा पसया के उप प्रधान जगदीश चंद्र परगाई ने मुख्य विकास अधिकारी को पत्र लिखकर इंश्योरेंस कंपनी द्वारा अनुदान दिए जाने के संबंध में पत्राचार किया है।

जगदीश ने आरोप लगाया कि इंश्योरेंस कंपनियां ग्रामीणों को अनुदान दिए जाने में आनाकानी करती हैं और उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है गेहूं के अलावा मटर की खेती भी सुख की मार से चौपट हो चुकी है।

वही सामाजिक कार्यकर्ता राम सिंह ने बताया कि ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों से इस समस्या के बारे में अवगत कराया।

लेकिन विधायक व अन्य जनप्रतिनिधियों ने कोई आश्वासन नहीं दिया। जिससे ग्रामीणों में काफी निराशा है।

काश्तकारों ने सरकार से ग्रामीण की समस्या को देखते हुए ऋण माफ व उचित मुआवजा देने की मांग की है।

सूखे की मार से फसलें बर्बाद, ग्रामीणों के सामने रोजी-रोटी का संकट

 

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