नैनीताल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें “लखपति दीदी” बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘हिलांश किचन’ योजना आज सफलता की नई कहानी लिख रही है।

नैनीताल कलेक्ट्रेट परिसर में संचालित हिलांश किचन का संचालन गीतांजलि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। यह किचन न केवल महिलाओं के लिए रोजगार का मजबूत माध्यम बना है, बल्कि उत्तराखण्ड की पारंपरिक खानपान संस्कृति को भी नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत हिलांश किचन का संचालन टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। इससे समूह की महिलाओं को बिना अतिरिक्त आर्थिक बोझ के स्वरोजगार शुरू करने का अवसर मिलता है और वे अपनी आय बढ़ाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

हिलांश किचन में तैयार होने वाले उत्तराखण्ड के पारंपरिक व्यंजन लोगों की पहली पसंद बन चुके हैं। यहां भट्ट के डुबके, भट्ट की चुड़कानी, कढ़ी-चावल, राजमा, मंडुवे की रोटी, पकौड़ी सहित कई स्थानीय व्यंजन परोसे जाते हैं। स्वाद, गुणवत्ता और आत्मीय सेवा के कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ नैनीताल आने वाले पर्यटक भी इन व्यंजनों का भरपूर आनंद लेते हैं। पहाड़ के पारंपरिक स्वाद को बढ़ावा मिलने से स्थानीय कृषि उत्पादों की मांग भी बढ़ रही है।

इस पहल का सबसे बड़ा लाभ स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को मिला है। हिलांश किचन के संचालन से समूह को प्रतिवर्ष लगभग 6 से 7 लाख रुपये की आय प्राप्त हो रही है। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और उनके परिवारों के जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव आया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें सफल उद्यमी बनाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर करना है। “लखपति दीदी” अभियान के तहत महिलाओं को आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार और समाज के विकास में योगदान दे सकें।

गीतांजलि स्वयं सहायता समूह की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि सरकार की योजनाओं का लाभ सही तरीके से जरूरतमंदों तक पहुंचे और महिलाएं पूरी मेहनत व लगन से कार्य करें, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।

हिलांश किचन आज न केवल महिलाओं की आर्थिक उन्नति का माध्यम बना है, बल्कि उत्तराखण्ड की पारंपरिक संस्कृति और स्थानीय व्यंजनों को देशभर में नई पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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