हल्द्वानी। राज्य सरकार के अधीन विभिन्न सरकारी विभागों, निगमों, कॉरपोरेशन और अर्धस्वायत्तशासी प्रतिष्ठानों में कार्यरत ठेका, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों ने समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को लेकर सरकार के सामने अपनी आवाज बुलंद की है। संयुक्त मोर्चा आउटसोर्स कर्मचारी संघ उत्तराखंड के नेतृत्व में विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजकर उपनल के अलावा अन्य माध्यमों से कार्यरत कर्मचारियों को भी स्थायी कर्मचारियों के समान वेतन देने की मांग की है।
मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष मंगलेश लखेड़ा और प्रदेश महामंत्री पान सिंह चिलवाल की ओर से 24 अगस्त 2026 को भेजे गए मांग पत्र में कहा गया है कि राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थानों में हजारों ठेका, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। संगठन का दावा है कि इनमें से कई कर्मचारी 25 वर्षों से अधिक समय से सरकारी कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं और स्थायी कर्मचारियों के समान जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
उपनल के साथ अन्य आउटसोर्स कर्मचारियों को भी लाभ देने की मांग
संगठन ने कहा कि सरकार द्वारा उपनल के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के लिए स्थायी कर्मचारियों के समान वेतन देने की घोषणा की गई है। मोर्चे का कहना है कि यदि समान कार्य करने वाले उपनल कर्मचारियों को यह लाभ दिया जा रहा है तो अन्य ठेका, संविदा और आउटसोर्स माध्यमों से कार्यरत कर्मचारियों को इससे वंचित रखना न्यायसंगत नहीं है।
मोर्चे ने सरकार से मांग की है कि उपनल के अलावा अन्य एजेंसियों, ठेकेदारों और आउटसोर्स माध्यमों से वर्षों से सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को भी समान कार्य के लिए समान वेतन का लाभ दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
मांग पत्र में संगठन ने सर्वोच्च न्यायालय के समान कार्य-समान वेतन से संबंधित निर्णय का हवाला देते हुए कहा है कि स्थायी कर्मचारियों के समान कार्य करने वाले अस्थायी कर्मचारियों के वेतन में भेदभाव नहीं होना चाहिए। संगठन ने सरकार से इस संबंध में न्यायालय के निर्देशों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप ठोस कार्रवाई करने की मांग की है।
मोर्चे का कहना है कि विभिन्न विभागों और संस्थानों में लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को समान वेतन का लाभ मिलने से उनके आर्थिक और सामाजिक हितों की रक्षा हो सकेगी। संगठन ने मुख्यमंत्री से मांग पर समयबद्ध कार्रवाई करने तथा की गई कार्रवाई से मोर्चे को अवगत कराने का अनुरोध किया है।
मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
आउटसोर्स कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर सरकार ने गंभीरता से विचार नहीं किया और सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो संयुक्त मोर्चा आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगा। संगठन ने कहा कि आंदोलन से उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
मोर्चे ने मुख्यमंत्री से मामले को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए प्रदेशभर में विभिन्न विभागों में वर्षों से कार्यरत सभी ठेका, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के हित में समान कार्य-समान वेतन लागू करने की मांग की है।
मुख्य मांगें:
उपनल के अलावा अन्य माध्यमों से कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को भी समान वेतन का लाभ मिले।
25 वर्षों से अधिक समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के हितों पर विशेष रूप से विचार हो।
स्थायी कर्मचारियों के समान कार्य करने वाले कर्मचारियों को समान वेतन दिया जाए।
मांग पर समयबद्ध निर्णय लेकर संगठन को अवगत कराया जाए।
मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।









