बरसात के चार महीने कट जाता है गांव का संपर्क, मरीजों और गर्भवती महिलाओं की जान पर बना रहता है खतरा
बेतालघाट। एक ओर सरकार गांव-गांव तक बेहतर सड़क और संपर्क सुविधाएं पहुंचाने के दावे कर रही है, वहीं नैनीताल जिले के बेतालघाट ब्लॉक का डोबा गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में हर बरसात के मौसम में अलग-थलग पड़ जाता है। गांव के सामने बहने वाली शिप्रा नदी पर पुल न होने के कारण बरसात के चार महीने ग्रामीणों का जीवन खतरे के साये में गुजरता है।
मानसून के दौरान शिप्रा नदी उफान पर आ जाती है और गांव का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग पूरी तरह टूट जाता है। ऐसे में ग्रामीणों को तेज बहाव के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। सबसे मार्मिक दृश्य तब देखने को मिलता है, जब छोटे-छोटे स्कूली बच्चों को उनके माता-पिता और परिजन कंधों पर बैठाकर उफनती नदी पार कराते हैं, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो सके।
ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी इसी खतरनाक रास्ते का सहारा लेना पड़ता है। घर का राशन, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामान नदी पार कर गांव तक पहुंचाया जाता है। बरसात के दिनों में हर कदम पर हादसे का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सबसे बड़ी चिंता उस समय होती है जब किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ जाए या किसी गर्भवती महिला को तत्काल अस्पताल ले जाने की आवश्यकता पड़े। तेज बहाव के कारण कई बार पूरा गांव कई दिनों तक बाहरी दुनिया से कटा रहता है और लोग पानी का स्तर कम होने का इंतजार करने को मजबूर हो जाते हैं।
ग्राम प्रधान हरेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि शिप्रा नदी पर झूला पुल निर्माण की मांग को लेकर कई बार शासन और प्रशासन को ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

उनका कहना है कि यदि यहां झूला पुल का निर्माण हो जाए तो डोबा गांव सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों को पूरे वर्ष सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सकेगी और बरसात के दौरान होने वाली परेशानियों से भी राहत मिलेगी।
ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से जल्द से जल्द झूला पुल निर्माण की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी।

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