नैनीताल। जंगल से लाई गई जंगली सब्जी को जीरक समझकर खाना एक परिवार के आठ सदस्यों के लिए भारी पड़ गया। अनजाने में नशीले पौधे की सब्जी से बनाए गए पकौड़े खाने के बाद परिवार के सभी आठ सदस्यों की तबीयत अचानक बिगड़ गई।
नशे का असर होने के बाद परिजन उन्हें आनन-फानन में जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचे, जहां सभी का उपचार चल रहा है। इनमें दो मरीजों की हालत अधिक नशे के कारण गंभीर बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार परिवार के कुछ सदस्य जंगल से सब्जी लेकर घर पहुंचे थे। परिवार ने जंगली पौधे को जीरक समझ लिया और उसकी सब्जी तैयार करने के बजाय उसके पकौड़े बनाए। परिवार के आठ सदस्यों ने इन पकौड़ों का सेवन कर लिया। पकौड़े खाने के कुछ ही देर बाद सभी को नशा महसूस होने लगा और उनकी तबीयत बिगड़ने लगी।
परिजनों ने जब उनकी हालत देखी तो तत्काल उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल की इमरजेंसी में चिकित्सकों ने सभी मरीजों की जांच शुरू की और उपचार दिया।
इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉ. सुनील कुमार के मुताबिक, अस्पताल पहुंचने के बाद मरीजों से पूछताछ की गई। मरीजों ने शुरुआत में जीरक के पकौड़े खाने की बात बताई थी। हालांकि जांच और पूछताछ के बाद सामने आया कि उन्होंने भूलवश किसी नशीले जंगली पौधे का सेवन कर लिया था, जिसके चलते उनमें नशे के लक्षण दिखाई दिए।
फिलहाल अस्पताल में भर्ती आठ मरीजों में से छह की हालत स्थिर बताई जा रही है, जबकि दो मरीजों पर नशे का अधिक प्रभाव है और उनका चिकित्सकीय निगरानी में उपचार जारी है। डॉक्टरों की टीम मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि जंगल या आसपास के क्षेत्रों से मिलने वाले किसी भी पौधे अथवा जंगली सब्जी की सही पहचान किए बिना उसका सेवन न करें। कई जंगली पौधे देखने में सामान्य सब्जियों जैसे दिखाई दे सकते हैं, लेकिन उनके सेवन से गंभीर स्वास्थ्य समस्या पैदा हो सकती है।
इस घटना ने एक बार फिर जंगली पौधों और कंद-मूल की पहचान को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में जंगल से लाई जाने वाली सब्जियों का सेवन करने से पहले उनकी सही पहचान और स्थानीय स्तर पर पुष्टि करना बेहद जरूरी है।








