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दिव्यांग पति सचिन की शिवभक्ति को पूरा करने के लिए पत्नी ने निभाया अनोखा संकल्प, दो बच्चों के साथ हरकी पैड़ी पहुंचकर भरा गंगाजल

हरिद्वार। कांवड़ यात्रा 2026 शुरू होने से पहले धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था, प्रेम और समर्पण की ऐसी भावुक तस्वीर सामने आई, जिसने श्रद्धालुओं और राहगीरों का दिल जीत लिया। उत्तर प्रदेश के मोदीनगर निवासी आशा अपने दिव्यांग पति सचिन को कंधों पर बैठाकर लगभग 180 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा तय करते हुए हरिद्वार पहुंचीं। इस अनोखी कांवड़ यात्रा को देखने के लिए रास्ते में लोग रुकते रहे और दंपति के जज्बे को सलाम करते हुए उनका उत्साहवर्धन करते रहे।

हरिद्वार पहुंचने के बाद दंपति ने सबसे पहले हरकी पैड़ी पर मां गंगा के पवित्र जल से कांवड़ भरी। इसके बाद कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का विधि-विधान से जलाभिषेक किया और फिर अपने अगले गंतव्य के लिए रवाना हो गए। इस पूरी यात्रा में उनके दो बच्चे भी उनके साथ चल रहे हैं, जो परिवार के इस संकल्प में सहभागी बने हुए हैं।

दिव्यांग पति सचिन ने बताया कि करीब 12 वर्ष पहले रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगने के कारण वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गए थे। शारीरिक कठिनाइयों के बावजूद भगवान भोलेनाथ के प्रति उनकी आस्था कभी कम नहीं हुई। पिछले वर्ष उन्होंने कांवड़ यात्रा की इच्छा जताई थी, जिसके बाद उनकी पत्नी आशा ने उन्हें अपने कंधों पर बैठाकर पहली बार यह यात्रा पूरी कराई। इस वर्ष भी उन्होंने उसी संकल्प को दोहराते हुए फिर से अपने पति को कंधों पर बैठाकर हरिद्वार तक की कठिन पदयात्रा पूरी की।

आशा का कहना है कि पति का साथ निभाना और उनकी सेवा करना उनका कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि रिश्तों की मजबूती त्याग, विश्वास और सम्मान से बनी रहती है। उन्होंने महिलाओं से भी पारिवारिक मूल्यों और रिश्तों की मर्यादा को बनाए रखने का संदेश दिया।

वहीं सचिन ने अपनी पत्नी के त्याग और समर्पण की भावुक शब्दों में सराहना करते हुए कहा कि पत्नी के साथ होने से उन्हें कभी अपनी दिव्यांगता का एहसास नहीं होता। उन्हें पूरा विश्वास है कि भगवान शिव की कृपा से एक दिन वह फिर से स्वस्थ होकर अपने पैरों पर चल सकेंगे।

कांवड़ यात्रा के दौरान इस दंपति की अनोखी यात्रा लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। रास्ते में मिलने वाले श्रद्धालु उनके साथ तस्वीरें खिंचवा रहे हैं, उनका हौसला बढ़ा रहे हैं और भगवान शिव से उनकी सफल यात्रा तथा सुखी जीवन की कामना कर रहे हैं। आस्था, प्रेम, विश्वास और समर्पण की यह मिसाल कांवड़ यात्रा 2026 की सबसे भावुक और प्रेरणादायक तस्वीरों में से एक बन गई है।

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