उत्तराखंड में बीजेपी में टिकट से पहले एग्जाम
मंत्रियों-विधायकों को देनी होंगी 3 गुप्त तिमाही परीक्षाएं
देहरादून। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अपने मंत्रियों और विधायकों की कड़ी परीक्षा लेने जा रही है।
पार्टी संगठन इस वर्ष तीन गुप्त तिमाही आंतरिक सर्वे (परीक्षाएं) आयोजित करेगा, जिनमें मिले अंकों को केंद्रीय नेतृत्व द्वारा कराए जाने वाले फाइनल सर्वे में जोड़ा जाएगा। इन सभी चरणों में सफल रहने वाले नेताओं को ही चुनावी टिकट मिलने की संभावना होगी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बीजेपी संगठन तीन स्तरों पर यह आंतरिक मूल्यांकन करेगा। तिमाही आधार पर होने वाले इन गुप्त सर्वे के बाद केंद्रीय नेतृत्व की ओर से मुख्य परीक्षा (फाइनल सर्वे) कराई जाएगी। पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा, ताकि निष्पक्ष और वास्तविक आकलन सुनिश्चित किया जा सके।
मंत्रियों-विधायकों के कार्यकाल का होगा गहन मूल्यांकन
इन सर्वेक्षणों में मंत्रियों और विधायकों के पूरे वर्ष के प्रदर्शन को परखा जाएगा। मूल्यांकन के प्रमुख मानकों में सरकार और संगठन के बीच समन्वय, संगठनात्मक गतिविधियों में भागीदारी, जनता के बीच छवि, क्षेत्र में उपलब्धता, समस्याओं के समाधान की क्षमता और जमीनी स्तर पर किए गए कार्य शामिल होंगे।
इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि जनप्रतिनिधि पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों को आम जनता तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंचा पा रहे हैं।
बहुस्तरीय फीडबैक से होगी निष्पक्ष जांच
बीजेपी संगठन क्षेत्रीय, जिला, मंडल और बूथ स्तर तक तीन चरणों में फीडबैक एकत्र करेगा। हर स्तर से अलग-अलग राय ली जाएगी, ताकि किसी एक स्रोत पर निर्भरता न रहे। इसके अलावा स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों, सामाजिक प्रतिनिधियों और सक्रिय पार्टी कार्यकर्ताओं से भी फीडबैक लिया जाएगा, जिससे जनप्रतिनिधियों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
जनता की पसंद को मिलेगी प्राथमिकता
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इस निरंतर और बहुस्तरीय मूल्यांकन प्रणाली से उन्हीं नेताओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा, जो संगठन और जनता दोनों की कसौटी पर खरे उतरेंगे। यह प्रक्रिया न केवल टिकट वितरण को अधिक पारदर्शी बनाएगी, बल्कि मंत्रियों और विधायकों को पूरे कार्यकाल में सक्रिय और जवाबदेह बने रहने का संदेश भी देगी।
राजनीतिक हलकों में बीजेपी के इस कदम को ‘परफॉर्मेंस आधारित राजनीति’ की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें चुनावी सफलता से पहले संगठनात्मक मजबूती और जमीनी कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।














