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नैनीताल । सामाजिक कार्यकर्ती श्रीमती खष्टी बिष्ट ने एक शिष्टमंडल के साथ मुख्य शिक्षा अधिकारी नैनीताल से भेंट वार्ता की तथा निजी विद्यालय संचालकों की मनमानी के विरोध में ज्ञापन प्रेषित किया।

उन्होंने बताया कि नैनीताल जिले में कुछ निजी विद्यालय संचालकों द्वारा फीस वृद्धि से अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है।

साथ ही उन्होंने बताया की राष्ट्रीय मान्य पुस्तकों के स्थान पर महंगे निजी प्रकाशन की पुस्तकें लगाना और अन्य विभिन्न मदों में शुल्क में बढ़ोतरी करने से शिक्षा का बाजारीकरण हो गया है। 

उन्होंने निजी विद्यालय में शिक्षकों के आर्थिक शोषण पर प्रश्न उठाए। उन्होंने बताया की मध्यम वर्गीय परिवारों के आय के स्रोत सीमित है, उस पर निजी विद्यालय फीस अग्रिम राशि के रूप में वसूल रहे हैं जोकि निराशाजनक है। उन्होंने सुझाव दिया की शिक्षा के अधिकार में हर कक्षा के छात्रों की कि शुल्क की सीमा तय होनी चाहिए और सार्वभौमिक रूप से एकरूपता से ली जानी चाहिए। 

उन्होंने बताया कि विद्यालय संबंधी अन्य सामग्रियों के दामों में विगत दस वर्षों में गुणात्मक वृद्धि से निजी विद्यालयों में शिक्षा से मध्यवर्गीय परिवारों को दूर कर दिया है।

मुख्य शिक्षा अधिकारी श्री गोविंद जायसवाल ने ज्ञापन प्राप्त करते हुए आश्वासन दिलाया की अतिशीघ्र उचित करवाई की जाएगी। ज्ञापन भेंट करने वाले शिष्ट मंडल में खष्टी बिष्ट, बीना पांडे, शांति तिवारी, धनी दुमका, निर्मला आर्य, आशा कुमारी, रचना, सुमन देवी और अंजू उपस्थित थे।

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