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सड़क हादसे के बाद निजी अस्पताल की बेरुखी, घायल को इलाज से किया इनकार
रुद्रपुर में मानवता शर्मसार, पैसों और जिम्मेदारी का हवाला देकर अस्पताल ने झाड़े हाथ
रुद्रपुर। रविवार रात रुद्रपुर में एक बार फिर निजी अस्पतालों की संवेदनहीनता सामने आई, जहां गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को इलाज देने के बजाय पैसों और मौत की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए गए।
तेज रफ्तार ट्रक ने साइकिल सवार को मारी टक्कर
प्रत्यक्षदर्शी भदोहीपुरा निवासी आकाश यादव के अनुसार, रविवार शाम भदोहीपुरा मोड़ पर एक तेज रफ्तार ट्रक ने साइकिल सवार को जोरदार टक्कर मार दी।
हादसा इतना भीषण था कि साइकिल सवार सड़क पर गिर पड़ा और अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा।
100 मीटर दूर अस्पताल, लेकिन इलाज से किया इनकार
घायल की हालत गंभीर देख आसपास मौजूद राहगीरों ने बिना समय गंवाए उसे मात्र 100 मीटर दूर स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचाया।
लेकिन आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने इलाज शुरू करने के बजाय हाथ खड़े कर दिए।
राहगीरों का कहना है कि अस्पताल कर्मियों ने कहा—
“इलाज का खर्च कौन देगा?”
“अगर मरीज की मौत हो गई तो जिम्मेदारी कौन लेगा?”
दर्द से कराहता रहा घायल, अस्पताल बना मूकदर्शक
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घायल दर्द से कराह रहा था और लगातार खून बह रहा था, लेकिन अस्पताल प्रशासन का रवैया पूरी तरह असंवेदनशील और अमानवीय रहा।
समय की नजाकत को समझते हुए लोगों ने बहस में पड़ने के बजाय घायल को तुरंत जिला अस्पताल रुद्रपुर पहुंचाया, जहां उसका इलाज शुरू किया गया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की खुलेआम अवहेलना
यह घटना सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों और मोटर वाहन अधिनियम पर भी सवाल खड़े करती है, जिनमें साफ कहा गया है कि किसी भी अस्पताल को आपात स्थिति में घायल को प्राथमिक इलाज देने से इनकार करने का अधिकार नहीं है।
इसके बावजूद निजी अस्पताल द्वारा कानून की खुलेआम अनदेखी की गई।
लोगों में आक्रोश, उठे गंभीर सवाल
स्थानीय लोगों में घटना को लेकर भारी आक्रोश है।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर समय पर जिला अस्पताल न पहुंचाया जाता और घायल की जान चली जाती, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता?
क्या निजी अस्पताल सिर्फ मुनाफे का जरिया बनकर रह गए हैं?
CMO बोले—शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई
इस मामले में सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने कहा कि
“किसी भी निजी अस्पताल को गंभीर घायल मरीज के इलाज से मना करने का अधिकार नहीं है। अभी तक इस संबंध में कोई लिखित शिकायत नहीं आई है। शिकायत मिलने पर अस्पताल को चेतावनी दी जाएगी।”

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