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राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर के शोधार्थियों ने प्रस्तुत किए 25 शोध-पत्र, महिला अधिकारों के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सुशील शर्मा और पल्लवी बहुगुणा हुए सम्मानित

नैनीताल। कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल के माता जिया रानी महिला अध्ययन केंद्र की ओर से “भारतीय ज्ञान परंपरा में महिलाओं की भूमिका” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन एमएमटीटीवी, हार्मिटेज स्थित देवदार हॉल में किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा में महिलाओं के बहुआयामी योगदान को रेखांकित करते हुए समावेशी विरासत, महिला सशक्तिकरण तथा समकालीन चुनौतियों पर गंभीर अकादमिक विमर्श को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय, नैनीताल के विद्यार्थियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की।

महिलाओं की बौद्धिक विरासत पर हुआ गंभीर विमर्श

संगोष्ठी की मुख्य अतिथि नैनीताल विधायक सरिता आर्या तथा विशिष्ट अतिथि दर्जा राज्य मंत्री शांति मेहरा रहीं। विधायक सरिता आर्या ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में महिलाओं का योगदान सदैव महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने महिलाओं के ज्ञान, नेतृत्व और सामाजिक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उनकी आवाज़ को अकादमिक एवं नीतिगत विमर्श में उचित स्थान मिलना चाहिए।

मुख्य वक्ता प्रो. मधुलिका बनर्जी, प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय ने भारतीय ज्ञान परंपरा में महिलाओं की बौद्धिक विरासत, ज्ञान-सृजन में उनकी भूमिका तथा समकालीन भारत में महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास पर विस्तृत व्याख्यान दिया।

विशेषज्ञों ने रखे विचार

माता जिया रानी महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. नीता बोरा शर्मा ने संगोष्ठी के उद्देश्य और इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में प्रो. ऋषिपाल, उपासना बोरा, समाजसेवी एवं उद्यमी तथा अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ज्योतिषाचार्य नंदिता पांडे ने भी अपने विचार रखे। नंदिता पांडे ने भारतीय ज्योतिष को भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा बताते हुए इसके वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। शांति मेहरा ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण से ही भारत विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा। वहीं उपासना बोरा ने कहा कि आज महिलाएं स्वावलंबी बनने के साथ-साथ रोजगार सृजित करने वाली भी बन रही हैं।

देशभर से आए शोधार्थियों ने प्रस्तुत किए शोध-पत्र

संगोष्ठी के अंतर्गत दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए लगभग 25 शोधार्थियों एवं सहायक आचार्यों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए।

प्रस्तुत शोध-पत्रों में भारतीय ज्ञान परंपरा, महिला अध्ययन, सांस्कृतिक विरासत, शिक्षा, पर्यावरण, सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता तथा समकालीन सशक्तिकरण जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

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