मूलभूत सुविधाओं से वंचित ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, 2027 चुनाव से पहले भाजपा के लिए बढ़ी चुनौती
डोली के सहारे अस्पताल पहुंच रहे मरीज, विकास की अनदेखी पर ग्रामीणों ने खोला मोर्चा
नैनीताल। किसी भी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को सबसे अहम माना जाता है। लेकिन पर्यटन नगरी नैनीताल से सटे कई ग्रामीण क्षेत्र आज भी इन बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। वर्षों से सड़क, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं की मांग कर रहे ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। विकास कार्यों में लगातार हो रही देरी और जनप्रतिनिधियों की कथित उदासीनता को लेकर लोगों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांवों में आज भी सड़क सुविधा का अभाव है। बरसात के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं, जिससे गांवों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है। कई गांवों में मरीजों को मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए आज भी डोली का सहारा लेना पड़ता है। गंभीर बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने से मरीजों की जान तक खतरे में पड़ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति आजादी के दशकों बाद भी बनी हुई है, जो विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है।
पेयजल संकट भी क्षेत्र की बड़ी समस्या बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के सामने समस्या उठाई गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका। उनका आरोप है कि चुनाव के दौरान बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन चुनाव जीतने के बाद गांवों की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि मौजूदा विधायक ने चुनाव जीतने के बाद कई गांवों का दौरा तक नहीं किया और विकास कार्यों की समीक्षा भी नहीं की।
‘सड़क नहीं तो वोट नहीं’ का बुलंद हुआ नारा
क्षेत्र के कई गांवों में अब लोगों ने “सड़क नहीं तो वोट नहीं” का नारा बुलंद कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनके गांवों तक सड़क, पानी और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंचतीं, तब तक वे केवल आश्वासनों पर भरोसा नहीं करेंगे। उनका कहना है कि विकास हर गांव तक समान रूप से पहुंचना चाहिए और वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए।
2027 चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच नैनीताल विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक माहौल भी गर्माने लगा है। ग्रामीणों का दावा है कि आम जनता के साथ-साथ भाजपा के पारंपरिक समर्थकों में भी मौजूदा विधायक को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि यदि पार्टी ने आगामी चुनाव में उम्मीदवार नहीं बदला, तो इसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है।
कुछ ग्रामीणों ने यहां तक चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और पार्टी ने वर्तमान चेहरे को ही दोबारा मैदान में उतारा, तो वे चुनाव बहिष्कार पर भी विचार करेंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि जनहित और विकास को प्राथमिकता देने वाले नए नेतृत्व की जरूरत है।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित विधायक या भाजपा संगठन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि उनका पक्ष प्राप्त होता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


