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ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद भारत में चिंता, उत्तराखंड के छात्र भी फंसे

देहरादून/नई दिल्ली। अमेरिका और इज़रायल की ओर से ईरान पर किए जा रहे हमलों के बाद पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में भय और अनिश्चितता का माहौल बन गया है। हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई शीर्ष नेताओं की मौत की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा हालात को और अधिक संकटपूर्ण बना दिया है।

इस संघर्ष का असर केवल ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि कई देशों पर भी इसका प्रभाव महसूस किया जा रहा है। भारत के विभिन्न राज्यों के नागरिक, विशेषकर छात्र और धार्मिक शिक्षार्थी, इस समय ईरान के अलग-अलग शहरों में फंसे हुए हैं। इससे उनके परिवारों और सरकार की चिंता बढ़ गई है।

उत्तराखंड के भी कई युवा ईरान में अध्ययन और रोजगार के सिलसिले में गए हुए हैं। देहरादून निवासी वहाब, जो वहां मौलवियत की पढ़ाई कर रहे हैं, ने अपने परिजनों को फोन पर बताया कि हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि शहरों में सैन्य गतिविधियां तेज हैं और हवाई हमलों के डर से लोग घरों या सुरक्षित स्थानों में रहने को मजबूर हैं।

इधर भारत में परिवारजन लगातार अपने प्रियजनों की कुशलक्षेम जानने की कोशिश में जुटे हैं। भारत का विदेश मंत्रालय ने एडवाइजरी जारी कर भारतीय नागरिकों को फिलहाल ईरान और अन्य प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा टालने की सलाह दी है। साथ ही, वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षा और संभावित निकासी के लिए रणनीति तैयार की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बाधा और राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति विशेष चिंता का विषय है, क्योंकि बड़ी संख्या में छात्र, व्यापारी और धार्मिक शिक्षार्थी इन क्षेत्रों में मौजूद हैं।

स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने भी फंसे हुए नागरिकों की सहायता के लिए समन्वय शुरू कर दिया है। हालांकि सरकार लगातार प्रयासरत है, लेकिन क्षेत्र में जारी अनिश्चितता और तनाव ने परिवारों की चिंता को कम नहीं होने दिया है।

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