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चाइना पीक क्षेत्र में निर्माण कार्य के दौरान दीवार शिफ्ट करने का आरोप, स्थानीयों ने डीएम से की शिकायत

रिपोर्टर : गुड्डू सिंह ठठोला

नैनीताल। संवेदनशील चाइना पीक (नयना पीक) क्षेत्र में पहाड़ से गिरने वाले बोल्डरों को रोकने के लिए बनाई गई सुरक्षा दीवार से कथित छेड़छाड़ को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। क्षेत्रवासियों ने इसे भविष्य की बड़ी आपदा को न्योता बताते हुए जिलाधिकारी से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।

जानकारी के अनुसार वर्ष 1987 में नयना पीक से भारी मात्रा में मलवा और बोल्डर गिरने से शेरवानी क्षेत्र और ब्रूखिल हॉस्टल (वर्तमान ए.जी. ऑफिस) को भारी नुकसान पहुंचा था। इसके बाद तत्कालीन प्रशासन ने भूस्खलन प्रभावित इलाके में सुरक्षा दीवारों का निर्माण कराया था, जिसने वर्षों तक क्षेत्र को सुरक्षित बनाए रखा।

इन दिनों उसी संवेदनशील क्षेत्र में पुरुषोत्तम नामक व्यक्ति द्वारा निर्माण कार्य किया जा रहा है। आरोप है कि निर्माण के दौरान मुख्य सुरक्षा दीवार को तोड़कर अथवा शिफ्ट कर अपने अनुसार बनाया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा दीवार में किसी भी प्रकार का बदलाव इलाके के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

बताया गया कि संबंधित व्यक्ति को लोक निर्माण विभाग से कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई थी। अनुमति में स्पष्ट कहा गया था कि रोड साइड लैंड कंट्रोल एक्ट का पालन किया जाएगा, निर्माण सामग्री सड़क पर एकत्रित नहीं होगी और यातायात बाधित नहीं किया जाएगा। साथ ही निर्माण के बाद दीवार का स्वामित्व लोक निर्माण विभाग का रहेगा। विभाग ने यह भी चेतावनी दी थी कि भविष्य में पहाड़ी से पत्थर गिरने अथवा किसी दुर्घटना की स्थिति में पूरी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होगी। दीवार ध्वस्त करने की स्थिति में उसका मूल्य राजस्व विभाग में जमा करना भी अनिवार्य बताया गया था।

क्षेत्रीय निवासी मयंक मेहरा ने आरोप लगाया कि लोक निर्माण विभाग की सहमति से सुरक्षा दीवार को तोड़ा गया है। उनका कहना है कि यदि दोबारा मलवा आया तो जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि निर्माण प्रतिबंधित क्षेत्र में इतनी बड़ी मात्रा में निर्माण सामग्री कैसे पहुंच रही है। मयंक ने मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

वहीं जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कहा कि क्षेत्र के लोगों का प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला था। उन्होंने बताया कि वर्ष 1987 में यहां बड़ा भूस्खलन हुआ था, जिसके बाद आपदा मद से सुरक्षा दीवार बनाई गई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम और लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

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