गुलदार के हमले में हुई थी कमला देवी की मौत, पोस्टमार्टम और डब्ल्यूआइआइ रिपोर्ट ने की पुष्टि; परिवार को मिलेगा 10 लाख मुआवजा
बागेश्वर। कांडा तहसील के बांजीरौट गांव में चार अगस्त को गुलदार के हमले में जान गंवाने वाली 48 वर्षीय कमला देवी की मौत की पुष्टि वन्यजीव संघर्ष के रूप में हुई है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआइआइ) की जांच रिपोर्ट में मौत को गुलदार के हमले से जोड़ा गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद वन विभाग ने पीड़ित परिवार को मानकों के अनुसार 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, बांजीरौट गांव निवासी कमला देवी पत्नी पूरन राम चार अगस्त को गांव की बारी व्यवस्था के तहत करीब 19 परिवारों के 50 से अधिक मवेशियों को चराने के लिए जंगल गई थीं। उनके साथ उनके पति पूरन राम और बकरियां चरा रहे पंकज राम भी मौजूद थे। ग्रामीणों के मुताबिक, घटना के समय क्षेत्र में तेज बारिश के साथ घना कोहरा छाया हुआ था।
इसी दौरान झाड़ियों में छिपे गुलदार ने अचानक कमला देवी पर हमला कर दिया। महिला की चीख सुनकर उनके पति और पंकज राम तत्काल उनकी ओर दौड़े। दोनों को अपनी ओर आता देख गुलदार जंगल की तरफ भाग गया, लेकिन तब तक कमला देवी गंभीर रूप से घायल हो चुकी थीं। उनके गाल और सिर पर गुलदार के हमले के गहरे निशान मिले। घटना स्थल पर ही उनकी मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि के लिए महिला का पोस्टमार्टम कराया गया। साथ ही वन विभाग ने आवश्यक जांच के लिए उनके ब्लड सैंपल वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआइआइ) भेजे थे।
वन विभाग को करीब एक सप्ताह बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डब्ल्यूआइआइ की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई। दोनों रिपोर्ट के आधार पर कमला देवी की मौत को वन्यजीव संघर्ष की घटना माना गया है। रिपोर्ट से गुलदार के हमले में महिला की मौत होने की पुष्टि होने के बाद विभाग ने मुआवजे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
गुलदार की तलाश में पिंजड़ा और ट्रैप कैमरे लगाए
कमला देवी की मौत के बाद क्षेत्र में गुलदार की सक्रियता को देखते हुए वन विभाग ने ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए निगरानी बढ़ा दी है। गांव और आसपास के जंगल में गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजड़ा लगाया गया है। इसके अलावा उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कई स्थानों पर ट्रैप कैमरे भी लगाए गए हैं।
हालांकि, अब तक लगाए गए ट्रैप कैमरों में गुलदार की मौजूदगी दर्ज नहीं हुई है। वन विभाग की टीमें लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रही हैं और ग्रामीणों को भी जंगल में अकेले न जाने तथा विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
कमला देवी की मौत की आधिकारिक तौर पर वन्यजीव संघर्ष के रूप में पुष्टि होने के बाद अब ग्रामीणों की नजर गुलदार को पकड़ने के लिए वन विभाग की कार्रवाई पर है। क्षेत्र में लगातार निगरानी और पिंजड़े के जरिए गुलदार को पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है।



