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करोड़ों की धनराशि खर्च करने के बावजूद भी दो बूंद पानी को तरस रहे हैं ग्रामीण, नेता मस्त जनता त्रस्त

जहां एक और नेता अपने चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं, तो दूसरी ग्रामीण दो बूंद पानी के लिए कई किलोमीटरो की दूरी तय करने को मजबूर हैं।

आखिर इन पहाड़ों में निवास करने वाली जनता का दुख दर्द कौन समझेगा।

उत्तराखंड के नेताओं को केवल चुनाव  के समय में  जनता याद आती है झूठे वादे किए जाते हैं।

घर-घर नल पानी की बड़ी-बड़ी बातें कही जाती हैं,लेकिन हकीकत क्या है यह तस्वीर साफ बया कर रही हैं।

चुनाव जीतने के बाद नेता हल्द्वानी और देहरादून में अपनी शहरी जीवन शैली में मस्त है तो चुनाव के वक्त ही इनको दूर दराज गावों में निवास करने वाले ग्रामीण की याद आती है।

उत्तराखंड बने 23 साल बाद भी आज गांवों के हालात जस के तस 

ओखलकांडा। ग्राम सभा पश्या के तोक कैडाईजर धूरा में 5 साल के भीतर दो पाइप लाइन डाली जा चुकी है। जिसमें करोड़ों रुपए की धनराशि खर्च की गई फिर भी ग्रामीण दो बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।

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ग्रामीणों को पूरे दिन के पानी का इंतजाम करने में 6 से 7 घंटे का समय लग रहा है। जिससे ग्रामीण पानी की समस्या से परेशान है। दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना पड़ रहा है। पानी की व्यवस्था में निकल जा रहा है आधा दिन। 

सामाजिक कार्यकर्ता राम सिंह ने बताया कि इसमें नेता और ठेकेदारों की मिली भगत से पानी की लाइन गलत जगह से और स्रोतों का गलत चयन किया गया।

केवल पानी की पाइपलाइन तो डाल दी गई लेकिन पानी की दो बूंद के लिए ग्रामीण तरस रहे हैं नल सूखे हैं। जिससे यहां की ग्रामीणों में काफी रोष है। पानी की टंकियां भी दो बूंद पानी के लिए तरस रही हैं।

ग्रामीण बद्री दत्त,शिवदत्त, हरीश, तुलसी देवी,पार्वती देवी, ललित मोहन, महेश, दीपक आदि लोगों ने यथाशीघ्र पानी की समस्या से निजात लाने की मांग की है।

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