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हल्द्वानी। सरकार द्वारा लाई गई नई शिक्षा नीति से अभिभावक परेशान हो रहे हैं जिससे बच्चों के पहली कक्षा में एडमिशन कराने में बच्चों की आयु को लेकर दिक्कतों का सामान करना पड़ रहा है।

 कई अभिभावकों का कहना है कि सरकार की नई शिक्षा नीति के तहत पहली कक्षा में एडमिशन के वक्त दाखिला लेने वाले बच्चे की पहली अप्रैल को 6 वर्ष की आयु पूरी होनी चाहिए।

ऐसे में उन अभिभावको के सामने दुविधा आ खड़ी हुई है जिनके बच्चों की जन्मतिथि अप्रैल फर्स्ट वीक , मई या फिर जुलाई महीने की हैं जिससे कई अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।

उनका कहना है कि जिन बच्चों की जन्मतिथि अप्रैल फर्स्ट वीक या फिर मई महिने की है।

इस आदेश के चलते उन बच्चों का पूरा 1 साल बिना पढ़ाई के बर्बाद हो रहा है या उन्हें दोबारा अपने बच्चों का एलकेजी या यूकेजी में एडमिशन करना पड़ रहा है।

ऐसे में कई अभिभावक बच्चों को दोबारा उसी क्लास में पढ़ाने को भी मजबूर है।

अभिभावकों का कहना है कि सरकार को ऐसे बच्चों जिनकी जन्मतिथि अप्रैल के बाद मई, जून या फिर जुलाई महीने की है उनको आयु में छूट देनी चाहिए ताकि कुछ दिन या फिर महीनों के अंतराल के चलते बच्चों का एक वर्ष बर्बाद होने से बच सके और उनका भविष्य संवर सके।

अभिभावकों का कहना है कि सरकार अपनी मनमर्जी पर उतर आई है सरकार ने बिना जानकारी सार्वजनिक किए इसे लागू कर दिया हैं।

ऐसे में यदि अभिभावक स्कूल में एडमिशन कराने जा रहे हैं तो स्कूल की ओर से उन्हें सर्कुलर दिखाया जा रहा है।

वही कई अभिभावकों ने तो बच्चों की यूनिफॉर्म व कॉपी किताब तक ले ली है ऐसे हालातो में कई अभिभावक अब आर्थिक हालातो का सामना करने को मजबूर हैं।

वहीं नैनीताल न्यूज़ 24 के संपादक द्वारा जब सीईओ जगमोहन सोनी से इस मामले में संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि निदेशालय से सर्कुलर आया है।

अगर सरकार या निदेशालय स्तर से कोई छूट का प्रावधान होता है तो उसको लागू किया जाएगा।

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