बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव से नाराज ग्रामीण, मरीजों को आज भी डोली में ढोने की मजबूरी; विधायक पर उपेक्षा के आरोप

रिपोर्टर : गुड्डू सिंह ठठोला 

नैनीताल। किसी भी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं का होना आवश्यक माना जाता है। लेकिन नैनीताल विधानसभा क्षेत्र के कई नजदीकी ग्रामीण इलाके आज भी इन बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। कई गांवों में लोगों ने ‘सड़क नहीं तो वोट नहीं’ का नारा बुलंद करते हुए आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार तक की चेतावनी दे दी है।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं लगभग न के बराबर हैं। किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ने या किसी दुर्घटना की स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। आज भी कई गांवों में सड़क न होने के कारण मरीजों को डोली में लिटाकर कई किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है, जिसके बाद उन्हें जिला अस्पताल नैनीताल या हल्द्वानी ले जाया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में यह व्यवस्था जानलेवा साबित हो सकती है।

स्वास्थ्य के साथ-साथ पेयजल संकट भी ग्रामीणों की बड़ी समस्या बना हुआ है। लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार अपनी समस्याएं स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के समक्ष रखीं, लेकिन समाधान नहीं हो सका। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि चुनाव जीतने के बाद मौजूदा विधायक ने गांवों का दौरा कर विकास कार्यों की स्थिति जानने की भी जरूरत नहीं समझी।

भाजपा के पारंपरिक समर्थकों में भी नाराजगी

2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच नैनीताल विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक माहौल गर्माता नजर आ रहा है। भाजपा का मजबूत गढ़ माने जाने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस बार मौजूदा विधायक के प्रति असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि केवल आम मतदाता ही नहीं, बल्कि भाजपा के पारंपरिक समर्थक भी विधायक के कार्यों से नाराज हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि पार्टी आगामी चुनाव में उम्मीदवार नहीं बदलती है, तो भाजपा को इस सीट पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। कई गांवों में लोगों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और उम्मीदवार नहीं बदला गया, तो वे चुनाव बहिष्कार जैसे कदम पर भी विचार करेंगे।

‘पार्टी बदले चेहरा, तभी मिलेगा जनता का समर्थन’

क्षेत्रवासियों का कहना है कि पिछले वर्षों में विकास कार्यों की अनदेखी के कारण जनता का विश्वास कमजोर हुआ है। उनका मानना है कि यदि भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव में नया चेहरा सामने लाती है और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाती है, तो स्थिति बदल सकती है। अन्यथा आगामी चुनाव में पार्टी के लिए यह सीट चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।

हालांकि, इस संबंध में स्थानीय विधायक का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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