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नैनीताल में तिब्बती समुदाय का जुलूस, तिब्बत की आजादी को लेकर किया विरोध प्रदर्शन

रिपोर्टर: गुडडू सिंह ठठोला

नैनीताल। तिब्बती समुदाय के लोगों ने तिब्बत की आजादी की मांग को लेकर जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। सैकड़ों अनुयायियों ने तिब्बती मार्केट से बड़ा बाजार होते हुए मॉल रोड तक मार्च किया और चीन के खिलाफ नारेबाजी की।

तिब्बती समुदाय के लोगों ने बताया कि आज 67वें तिब्बती विद्रोह दिवस के उपलक्ष्य में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान तिब्बत की आजादी के लिए बलिदान देने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने कहा कि यह दिन चीनी कम्युनिस्ट शासन के गैरकानूनी कब्जे के खिलाफ तिब्बती प्रतिरोध का प्रतीक है और उन लाखों तिब्बतियों की याद दिलाता है, जो हिंसा और दमन के कारण मारे गए।

समुदाय के लोगों ने बताया कि वर्ष 1950 में चीन द्वारा तिब्बत पर कब्जा किए जाने के बाद बड़ी संख्या में तिब्बती नागरिकों ने भारत में शरण ली थी। तिब्बतियों के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के नेतृत्व में वे भारत के विभिन्न हिस्सों में शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं और छोटे-मोटे व्यवसाय कर अपना जीवनयापन कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि 10 मार्च 1959 को ल्हासा में चीन के खिलाफ पहला बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था, जिसकी स्मृति में तिब्बती समुदाय हर साल 10 मार्च को जन आंदोलन दिवस के रूप में मनाता है।

जुलूस में करीब 35 से 40 स्थानीय तिब्बती शामिल हुए। इस दौरान स्थानीय तिब्बती युवा कांग्रेस के अध्यक्ष तेनजिन, उपाध्यक्ष टाशी तोपग्याल, कुंगा छौडोन, वरिष्ठ सदस्य पेमा छौफेल, तिब्बती मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष येशी थुप्तेन, तिब्बती संघर्ष समिति के सचिव तेनजिन धोनयोए, तेनजिन छिरींग, तिब्बती महिला संगठन की उपाध्यक्ष सोनम छोएडोन, सचिव रिंजिन छोएजोम सहित कई लोग मौजूद रहे।

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