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उत्तराखंड में नेताओं को दायित्वों का वितरण तेज, नई नियुक्तियों की लहर

देहरादून। उत्तराखंड में नेताओं को दायित्व सौंपने की प्रक्रिया एक बार फिर तेज हो गई है। हाल ही में सरकार ने करीब 15 से 20 नेताओं को विभिन्न आयोगों, बोर्डों और परिषदों में उपाध्यक्ष और सदस्य के रूप में नियुक्त किया है।

कैबिनेट विस्तार के बाद शुरू हुई इस प्रक्रिया से साफ है कि पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार संगठन से जुड़े नेताओं को समायोजित करने में जुटी है।

सरकार इससे पहले भी दायित्वों की एक विस्तृत सूची जारी कर चुकी है और अब नए आदेशों के जरिए राजनीतिक नियुक्तियों का दायरा और बढ़ाया जा रहा है। हालांकि, हालिया नियुक्तियों की पूरी सूची अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन लगातार जारी हो रहे आदेशों से यह संकेत मिल रहे हैं कि दायित्वों का दायरा आने वाले समय में और विस्तृत हो सकता है।

इन नियुक्तियों में विवादों में रहे भाजपा नेता बलजीत सोनी को उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग का उपाध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा प्रमुख है। इसके अलावा राज्य स्तरीय खेल परिषद, राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद, राज्य पिछड़ा वर्ग परिषद, चाय विकास सलाहकार परिषद और युवा कल्याण सलाहकार परिषद जैसे विभिन्न संस्थानों में भी उपाध्यक्ष पदों पर नियुक्तियां की जा चुकी हैं।

सिर्फ उपाध्यक्ष ही नहीं, बल्कि कई नेताओं को सदस्य के रूप में भी जिम्मेदारी दी गई है। इनमें राजपाल कश्यप, रुचि गिरी, राव खाले खां, प्रेमलता, दीप प्रकाश नेवलिया, योगेश रजवार और मनोज गौतम जैसे नाम शामिल हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दायित्वों के जरिए सरकार संगठन के भीतर संतुलन बनाने और कार्यकर्ताओं को सम्मानजनक जिम्मेदारी देने का प्रयास कर रही है। चुनावी राजनीति में सक्रिय नेताओं की बड़ी संख्या के चलते सरकार के सामने उन्हें समायोजित करना एक चुनौती होता है, जिसे आयोगों, बोर्डों और परिषदों के माध्यम से हल किया जाता है।

उत्तराखंड की राजनीति में दायित्वों का वितरण कोई नई बात नहीं है। राज्य गठन के बाद नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व वाली पहली निर्वाचित सरकार के दौरान भी बड़े पैमाने पर इस तरह की नियुक्तियां चर्चा में रही थीं।

हालांकि, बीते कुछ वर्षों में सरकारें राजनीतिक आलोचना और वित्तीय भार के कारण बड़े स्तर पर दायित्व बांटने से बचती रही हैं। लेकिन अब एक बार फिर राज्य में दायित्वों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

सूत्रों के अनुसार, धामी सरकार के कार्यकाल में अब तक करीब 80 नेताओं को विभिन्न संस्थाओं में जिम्मेदारियां दी जा चुकी हैं, और आने वाले समय में यह सूची और लंबी हो सकती है।

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