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10 और निजी विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस, अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डालने पर जिला प्रशासन का सख्त रुख

नैनीताल/हल्द्वानी।  जिला प्रशासन ने निजी विद्यालयों की मनमानी पर सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

नोटिस पाने वाले स्कूलों में वुडलैंड सीनियर सेकेंडरी स्कूल, डी लैंप पब्लिक स्कूल, दर्पण पब्लिक स्कूल, इम्युनल पब्लिक स्कूल, हाइलेंडर्स पब्लिक स्कूल, ग्रीन सिटी पब्लिक स्कूल, टेंडर फीट पब्लिक स्कूल, एल्केमे स्कूल, जय दुर्गे एजुकेशनल पब्लिक स्कूल और न्यू फेगलैंड पब्लिक स्कूल शामिल हैं। इससे पहले जिले के विभिन्न क्षेत्रों—हल्द्वानी, लालकुआं, रामनगर, भवाली और भीमताल—के 28 विद्यालयों को भी नोटिस जारी किया जा चुका है।

जांच में सामने आया कि कई निजी स्कूल एनसीईआरटी पुस्तकों के बजाय महंगी निजी प्रकाशनों की किताबें अनिवार्य कर रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसके अलावा कुछ स्कूल विशेष दुकानों से किताबें खरीदने के लिए दबाव बना रहे हैं और अपनी वेबसाइट पर जरूरी जानकारी भी सार्वजनिक नहीं कर रहे।

यह कार्रवाई शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 और उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और किफायती बनाना है।

मुख्य शिक्षा अधिकारी ने संबंधित विद्यालयों को 15 दिनों के भीतर संशोधित पुस्तक सूची जारी करने, एनसीईआरटी पुस्तकों को प्राथमिकता देने, किसी विशेष विक्रेता की बाध्यता खत्म करने और वेबसाइट पर शुल्क व पुस्तकों की पूरी जानकारी अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अभिभावकों से पहले खरीदी गई अनावश्यक किताबों का पैसा लौटाने या समायोजन करने और अतिरिक्त शुल्क को आगामी फीस में एडजस्ट करने को भी कहा गया है।

जिलाधिकारी के निर्देश पर इन स्कूलों की जांच के लिए विकासखंड स्तर पर संयुक्त जांच समितियां गठित की गई हैं, जो 15 दिन के भीतर रिपोर्ट देंगी।

तय समय में आदेशों का पालन न करने पर स्कूलों की मान्यता निलंबित या निरस्त करने सहित सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन ने साफ किया है कि आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हैं और किसी भी तरह की अनदेखी को गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

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