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रानीबाग का गार्गी तट बना आस्था का केंद्र, गंगा आरती के एक वर्ष पूर्ण होने पर भव्य आयोजन

गार्गी नदी तट को मिलेगी नई पहचान, धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी

दीपों की रोशनी और मंत्रोच्चार से आलोकित हुआ गार्गी तट, हजारों श्रद्धालु हुए शामिल

हल्द्वानी। रानीबाग स्थित गार्गी नदी तट पर शुरू हुई गंगा आरती ने एक वर्ष का सफल सफर पूरा कर लिया है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून 2026 को आयोजित विशेष कार्यक्रम में गार्गी मां की भव्य आरती, सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ तथा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

उल्लेखनीय है कि 5 जून 2025 को हल्द्वानी के महापौर गजराज सिंह बिष्ट की पहल पर गार्गी नदी तट पर नियमित गंगा आरती की शुरुआत की गई थी। एक वर्ष के भीतर यह आरती स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गई है। प्रतिदिन होने वाली आरती में अब बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव करते हैं।

एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान पूरे गार्गी तट पर भक्तिमय माहौल देखने को मिला। दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार और भक्ति संगीत के बीच श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

महापौर गजराज सिंह बिष्ट ने कहा कि गार्गी नदी तट को धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान दिलाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि गार्गी तट के साथ-साथ चित्रशिला घाट तथा माता जिया रानी मंदिर के सौंदर्यीकरण की दिशा में भी कार्य किए जा रहे हैं। उनका उद्देश्य इन स्थलों को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित करना है, जिससे क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षण मिलने के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि गार्गी मां की आरती को लेकर श्रद्धालुओं का लगातार समर्थन मिल रहा है। गार्गी नदी तट अब हल्द्वानी की धार्मिक पहचान के रूप में उभर रहा है। आरती, हनुमान चालीसा और भंडारे जैसे आयोजन सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को भी मजबूत कर रहे हैं।

वहीं नगर आयुक्त परितोष वर्मा ने बताया कि नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत गार्गी नदी तट पर रिवर फ्रंट विकसित करने और नदी की स्वच्छता बनाए रखने की दिशा में योजनाएं तैयार की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में गार्गी तट धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।

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