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उत्तराखंड के चर्चित करीब 800 करोड़ रुपये के एलयूसीसी (LUCC) चिटफंड घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 25 करोड़ रुपये मूल्य की 23 संपत्तियों को अटैच कर लिया है।

ये संपत्तियां उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के मुंबई में स्थित हैं। कार्रवाई अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम (BUDS Act) के तहत की गई है।

अब इन संपत्तियों की नीलामी कर पीड़ित निवेशकों की राशि लौटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

सीबीआई जांच में खुलासा हुआ कि निवेशकों से ठगी गई रकम से आरोपियों ने कई शहरों में बेनामी संपत्तियां खरीदी थीं। उत्तराखंड में छह संपत्तियां बड्स के नोडल अधिकारी के माध्यम से कुर्क कराई गईं, जबकि उत्तर प्रदेश में अदालत की अनुमति के बाद 16 और मुंबई में एक संपत्ति को जब्त किया गया। सीबीआई का कहना है कि आरोपियों की अन्य छिपी संपत्तियों की तलाश भी लगातार जारी है।

गौरतलब है कि इस घोटाले की जांच पिछले वर्ष 26 नवंबर को सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच शुरू होने के 168 दिन बाद 13 मई को पहली बड़ी सफलता मिली, जब पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद मुंबई से दो अन्य आरोपी भी पकड़े गए। हालांकि मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल और उसकी पत्नी अब भी फरार हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों जांच सीबीआई को सौंपे जाने से पहले ही विदेश भाग चुके थे।

अब तक सीबीआई सात आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और पूरे मामले की दैनिक समीक्षा के साथ जांच आगे बढ़ाई जा रही है। एजेंसी का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

एलयूसीसी ने वर्ष 2021 में देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार समेत उत्तराखंड के आठ जिलों में 35 शाखाएं खोलकर लोगों को एजेंट बनाया था। कंपनी ने बैंकों से अधिक ब्याज का लालच देकर एफडी और आरडी के नाम पर करोड़ों रुपये जुटाए और वर्ष 2023-24 में अचानक कार्यालय बंद कर संचालक फरार हो गए। इसके बाद राज्यभर में कंपनी के खिलाफ 50 से अधिक मुकदमे दर्ज हुए।

बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर यह मामला सीबीआई को सौंपा गया, जिसने राज्य पुलिस द्वारा देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, हरिद्वार, टिहरी, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी समेत विभिन्न जिलों में दर्ज 18 एफआईआर को एक साथ जोड़कर व्यापक जांच शुरू की। मामला धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स (BUDS) एक्ट की धाराओं के तहत दर्ज है।

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