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हाईकोर्ट के आदेश का पालन न होने पर कार्मिक, वित्त और सैनिक कल्याण सचिव होंगे पेश, अवमानना मामले में चार्ज फ्रेम करने के संकेत

रिपोर्टर: गुड्डू सिंह ठठोला

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय में उपनल संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़े बहुचर्चित मामले में गुरुवार को अहम सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने अपने पूर्व आदेशों का पालन नहीं किए जाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार के कार्मिक सचिव, वित्त सचिव और सैनिक कल्याण सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई पर इन अधिकारियों के खिलाफ अवमानना मामले में चार्ज फ्रेम किया जाएगा।

यह मामला राज्य के करीब 22 हजार उपनल संविदा कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2018 में हाईकोर्ट ने उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के पक्ष में आदेश दिया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, लेकिन वर्ष 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने भी कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सरकार को राहत नहीं दी।

इसके बावजूद कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार पिछले एक वर्ष से हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करने के बजाय मामले को लगातार टालती रही। इसी को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को तलब कर लिया।

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन दिए जाने की बात कही गई, जबकि कर्मचारियों के पक्ष ने आरोप लगाया कि नियमितीकरण के बजाय उनकी सेवाएं समाप्त करने की कोशिश की जा रही है।

अब इस मामले में अगली सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद राज्य के हजारों उपनल संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर बड़ा फैसला आने की उम्मीद बढ़ गई है।

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