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बागेश्वर के कपकोट ब्लॉक के जातौली तोक में बारिश के बीच ग्रामीणों ने कंधों पर उठाकर बचाई महिला की जान, छह माह पहले वी-सेट की मांग के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

बागेश्वर। पहाड़ के दूरस्थ गांवों में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। ताजा मामला कपकोट विकासखंड की ग्राम पंचायत वाछम के दूरस्थ जातौली तोक का है, जहां अचानक एक महिला की तबीयत बिगड़ने पर ग्रामीणों को उन्हें करीब 10 किलोमीटर तक डोली में उठाकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा। यह घटना एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क, संचार और स्वास्थ्य सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को सामने लेकर आई है।

जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित जातौली तोक निवासी 50 वर्षीय दुर्गा देवी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। लगातार हो रही बारिश, फिसलन भरे रास्ते और उफनते गधेरों के बीच गांव में न तो सड़क सुविधा है और न ही मोबाइल नेटवर्क। ऐसे में एंबुलेंस बुलाना भी संभव नहीं था।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने लकड़ी के दो डंडों पर तिरपाल और दरी बांधकर अस्थायी डोली तैयार की। इसके बाद कई ग्रामीणों ने बारी-बारी से महिला को अपने कंधों पर उठाया और लगभग 10 किलोमीटर के दुर्गम पैदल मार्ग को पार कर खाती मोटर मार्ग तक पहुंचाया। वहां से उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खाती ले जाया गया, जहां उनका उपचार शुरू किया गया।

ग्राम प्रधान दिनेश सिंह दानू ने बताया कि जातौली तोक के करीब 30 परिवार आज भी सड़क और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। यदि गांव में मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध होता तो समय रहते 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना देकर महिला को सीधे अस्पताल पहुंचाया जा सकता था।

उन्होंने बताया कि करीब छह माह पूर्व जिला मजिस्ट्रेट, उपजिलाधिकारी कपकोट और क्षेत्रीय विधायक को गांव में वी-सेट अथवा सैटेलाइट फोन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लिखित आवेदन दिया गया था, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में ग्रामीणों को तत्काल मदद मिल सके। हालांकि अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।

ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांगें वर्षों से सरकारी फाइलों में ही सीमित हैं। सड़क और संचार सुविधाओं के अभाव में हर आपातकाल उनके लिए जिंदगी और मौत की लड़ाई बन जाता है।

दुर्गा देवी को डोली में अस्पताल पहुंचाने की यह घटना न केवल ग्रामीणों की एकजुटता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी आज भी गंभीर चुनौती बनी हुई है।

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