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देहरादून। उत्तराखंड के राजकीय प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों में वर्षों से चली आ रही शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ी पहल की है।

प्रदेशभर के सरकारी विद्यालयों में बेसिक शिक्षकों के 1,586 रिक्त पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इन रिक्तियों का विवरण राज्य के सभी 13 जनपदों से प्राप्त हो चुका है और अब विभाग अंतिम चरण की प्रक्रिया में जुट गया है।
प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय को जिला शिक्षा अधिकारियों (प्राथमिक) से विद्यालयवार रिक्त पदों का प्रमाणित ब्योरा मिल गया है। यह रिक्तियां प्रदेश के 1,307 राजकीय प्राथमिक एवं जूनियर हाईस्कूलों में हैं। निदेशालय ने प्रत्येक विद्यालय में छात्र संख्या, स्वीकृत पद, कार्यरत शिक्षकों की संख्या तथा रिक्त पदों का विस्तृत विवरण मंगाया था, ताकि वास्तविक आवश्यकता का आकलन किया जा सके।
पहले होंगे अनुरोध आधारित तबादले
शिक्षा विभाग पहले इन रिक्तियों का उपयोग वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम के तहत अनुरोध आधारित शिक्षक स्थानांतरण के लिए करेगा। स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद बची हुई वास्तविक रिक्तियों के आधार पर भर्ती प्रस्ताव तैयार किया जाएगा और चयन प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से कई विद्यालयों में शिक्षकों के पद खाली होने के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। नई भर्ती पूरी होने के बाद विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा।
इन जिलों में सबसे अधिक और सबसे कम रिक्तियां
जारी आंकड़ों के अनुसार उत्तरकाशी में सबसे अधिक 230 पद रिक्त हैं। इसके बाद नैनीताल में 196, चमोली में 186, टिहरी में 156, हरिद्वार में 146, पिथौरागढ़ में 142, ऊधमसिंह नगर में 134 और देहरादून में 119 पद खाली हैं।
वहीं पौड़ी में 73, बागेश्वर में 70, रुद्रप्रयाग में 62, चंपावत में 59 तथा अल्मोड़ा में सबसे कम 58 पद रिक्त हैं।
विभाग का दावा: इस वर्ष भरे जाएंगे सभी पद
प्रारंभिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार जनपदों से रिक्त पदों का प्रमाणित विवरण प्राप्त हो चुका है।

पहले अनुरोध आधारित स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, इसके बाद वास्तविक रिक्तियों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी। विभाग का दावा है कि इस वर्ष सभी रिक्त पदों को भरने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी काफी हद तक दूर हो सकेगी।

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