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नैनीताल से महज 11 किमी दूर गांव में आज भी डोली के सहारे मरीजों को पहुंचाना पड़ता है सड़क तक, भाजपा नेता हेम आर्य ने दिया समाधान का भरोसा, विधायक सरिता आर्या ने बताई वन विभाग की अनुमति बाधा

रिपोर्टर: गुड्डू सिंह ठठोला

नैनीताल। आजादी के 75 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद नैनीताल जनपद की न्याय पंचायत खुर्पाताल अंतर्गत ग्राम सभा बजून-फगुनियाखेत आज भी मोटर मार्ग जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि वर्षों से केवल आश्वासन मिलते रहे, लेकिन सड़क निर्माण का सपना आज तक पूरा नहीं हो सका।

इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को फगुनियाखेत में महिला समूह की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। बैठक में सर्वसम्मति से चेतावनी दी गई कि यदि गांव को जल्द सड़क सुविधा नहीं मिली तो वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।

बैठक के दौरान ग्रामीणों ने भाजपा नेता हेमचंद आर्य का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया और उनके समक्ष अपनी वर्षों पुरानी समस्या रखी। ग्रामीणों ने बताया कि फगुनियाखेत तक मात्र तीन से चार किलोमीटर मोटर मार्ग का निर्माण होना है, लेकिन आजादी के इतने वर्षों बाद भी यह सड़क स्वीकृत नहीं हो सकी।

ग्रामीणों ने कहा कि सबसे अधिक परेशानी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर होती है। किसी के बीमार पड़ने या गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ने पर आज भी मरीजों को डोली में बैठाकर कई किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।

कई बार ऐसी परिस्थितियों में मरीजों की जान भी जोखिम में पड़ जाती है। ग्रामीणों ने कहा कि पिछले 30–35 वर्षों में कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन सड़क निर्माण के नाम पर केवल आश्वासन ही मिले।

बैठक में ग्रामीणों का गुस्सा स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नेताओं पर भी फूटा। उनका आरोप था कि चुनाव के समय नेता गांव में वोट मांगने आते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कभी क्षेत्र की सुध नहीं लेते। ग्रामीणों ने कहा कि वर्तमान विधायक सरिता आर्या भी गांव में विकास कार्यों को लेकर कभी नहीं पहुंचीं। इसी कारण अब ग्रामीणों ने “सड़क नहीं तो वोट नहीं” का नारा देते हुए 2027 विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का निर्णय लिया है।

ग्रामीणों ने बताया कि एक समय 1980 के दशक में फगुनियाखेत मार्ग पर ट्रक तक चलते थे, लेकिन आज स्थिति यह है कि गांव सड़क के लिए तरस रहा है। कभी लगभग 2,500 आबादी वाले इस क्षेत्र में अब सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में पलायन बढ़ने से केवल करीब 60 लोग ही रह गए हैं।

ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद भाजपा नेता हेमचंद आर्य ने कहा कि भाजपा सरकार जनहित के कार्यों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वासन दिया कि फगुनियाखेत सड़क निर्माण का मामला प्राथमिकता के साथ शासन-प्रशासन के समक्ष उठाया जाएगा और सरकार का पूरा प्रयास रहेगा कि जल्द से जल्द क्षेत्र को मोटर मार्ग की सुविधा मिल सके, जिससे ग्रामीणों को राहत मिले।

वहीं, क्षेत्रीय विधायक सरिता आर्या ने कहा कि फगुनियाखेत और जमीर क्षेत्र के सड़क प्रस्ताव की फाइल कई बार शासन को भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक अनुमति नहीं मिल सकी है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित मार्ग बांज के घने जंगल से होकर गुजरता है, जिसके कारण वन विभाग से स्वीकृति मिलने में दिक्कत आ रही है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा भी पूर्व में सड़क निर्माण की घोषणा की गई थी और सरकार क्षेत्र के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। विधायक ने कहा कि वह क्षेत्र की महिलाओं और ग्रामीणों की समस्याओं से भलीभांति परिचित हैं तथा सड़क निर्माण के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि इस विषय पर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से बचना चाहिए।

बैठक में ग्रामीण मोर्चा (ओबीसी) के महामंत्री गौरव गोस्वामी, जानकी कोटलिया, आई.पी.आर.पी. अनीता, प्रधान प्रतिनिधि नंदन सिंह, भूपाल सिंह, नीमा कनवाल, किशन भट्ट, हरीश सिंह, शंकर सिंह, कमला देवी, हिमानी, हेमा, बबीता, भवानी देवी, लता देवी, किरण देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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