हल्द्वानी-रामलीला मैदान शुद्धिकरण मामले पर राहुल गांधी के बयान का पलटवार..
श्री राम सेवा धर्मार्थ न्यास ने कहा ,शुद्धिकरण सनातन आस्था और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा।
हल्द्वानी। रामलीला मैदान शुद्धिकरण मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मामले में श्री राम सेवा धर्मार्थ न्यास के तत्वावधान में प्रेस वार्ता आयोजित कर न्यास के पदाधिकारियों ने राहुल गांधी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान का शुद्धिकरण किसी राजनीतिक दल, व्यक्ति अथवा जातिगत राजनीति से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह सनातन आस्था, धार्मिक परंपराओं और श्रद्धालुओं की भावनाओं से संबंधित विषय है।
प्रेस वार्ता में न्यास के पदाधिकारियों ने कहा कि रामलीला मैदान लंबे समय से धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। ऐसे स्थान की पवित्रता, धार्मिक मर्यादा और गरिमा को बनाए रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराओं के अनुरूप किए गए शुद्धिकरण कार्यक्रम को राजनीतिक या जातिगत विवाद का रूप देना उचित नहीं है।
न्यास पदाधिकारियों के अनुसार, शुद्धिकरण की प्रक्रिया सनातन धार्मिक परंपराओं का हिस्सा है। किसी धार्मिक आयोजन या स्थल की पवित्रता को लेकर श्रद्धालुओं द्वारा अपनी मान्यताओं के अनुसार पूजा-अनुष्ठान करना उनकी आस्था का विषय है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान को किसी व्यक्ति अथवा समुदाय के विरोध के रूप में देखना सही नहीं है।
उन्होंने राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सनातन आस्था और धार्मिक परंपराओं को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय श्रद्धालुओं की भावनाओं को समझने और उनका सम्मान करने की आवश्यकता है। न्यास ने कहा कि धार्मिक विषयों पर राजनीतिक टिप्पणी किए जाने से अनावश्यक विवाद पैदा होता है और इससे समाज के एक बड़े वर्ग की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
प्रेस वार्ता में यह भी स्पष्ट किया गया कि रामलीला मैदान में किया गया शुद्धिकरण कार्यक्रम किसी व्यक्ति, जाति या समुदाय के विरोध में आयोजित नहीं किया गया था। न्यास के मुताबिक यह धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुरूप किया गया आस्था आधारित कार्यक्रम था, जिसका उद्देश्य धार्मिक स्थल की पवित्रता और मर्यादा बनाए रखना था।
न्यास पदाधिकारियों ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का समाज में विशेष महत्व है। ऐसे स्थानों से लोगों की आस्था जुड़ी होती है और वहां होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों को उसी भावना के साथ देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन धर्म और आस्था से जुड़े विषयों पर सभी पक्षों को संयम और संवेदनशीलता का परिचय देना चाहिए।
अंत में श्री राम सेवा धर्मार्थ न्यास ने राहुल गांधी से अपील की कि वे भविष्य में धार्मिक एवं आस्था से जुड़े विषयों पर बयान देते समय सनातन समाज की भावनाओं और धार्मिक परंपराओं का सम्मान रखें।
न्यास ने कहा कि धार्मिक आस्था को राजनीतिक विवाद का विषय बनाने के बजाय आपसी सम्मान और सामाजिक सौहार्द को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।










