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नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल में रविवार को ‘रन टू लाइव’ संस्था की ओर से मानसून मैराथन का आयोजन किया गया। पहाड़ों की खूबसूरत वादियों के बीच आयोजित इस मैराथन में देश-दुनिया के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे धावकों ने उत्साह और जुनून के साथ प्रतिभाग किया। चुनौतीपूर्ण पहाड़ी रास्तों और उतार-चढ़ाव से भरे ट्रैक पर धावकों ने अपने दमखम का शानदार प्रदर्शन किया।

मैराथन में पुरुष और महिला वर्ग के लिए 21 किलोमीटर, 10 किलोमीटर, 5 किलोमीटर और 4 किलोमीटर की अलग-अलग दौड़ आयोजित की गई। फ्लैग ऑफ होते ही धावकों ने पूरे उत्साह के साथ दौड़ शुरू की। पहाड़ी रास्तों की कठिन चुनौतियों के बावजूद धावकों का जोश देखते ही बना। रास्ते में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर और उत्साहवर्धन कर धावकों का हौसला बढ़ाया।

15 वर्षों से जारी है नैनीताल मैराथन

नैनीताल मैराथन का आयोजन लगातार करीब 15 वर्षों से किया जा रहा है। इस बार मैराथन का उद्देश्य एकजुटता की भावना को बढ़ावा देने के साथ ही मानसून सीजन में नैनीताल में पर्यटन को प्रोत्साहित करना रहा। आयोजकों का कहना है कि मानसून में पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता अपने अलग ही रूप में दिखाई देती है और इस तरह के आयोजनों से देश-विदेश के लोगों को उत्तराखंड की खूबसूरती से रूबरू कराने के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है।

मैराथन के चुनौतीपूर्ण ट्रैक पर दौड़ना धावकों के लिए आसान नहीं था, लेकिन प्रतिभागियों ने पूरे जोश के साथ कठिन चढ़ाई और ढलानों को पार किया। दौड़ पूरी करने के बाद धावकों ने आयोजन और ट्रैक की सराहना करते हुए इसे शानदार अनुभव बताया।

कोटद्वार के प्रभु ने मारी बाजी

मैराथन की प्रमुख दौड़ में कोटद्वार के धावक प्रभु ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया। वहीं केन्या के धावक जॉन दूसरे स्थान पर रहे। अंतरराष्ट्रीय स्तर के धावकों की मौजूदगी ने प्रतियोगिता को और रोमांचक बना दिया। अलग-अलग वर्गों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले धावकों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

आयोजन के दौरान विजेता प्रतिभागियों को लाखों रुपये की पुरस्कार राशि वितरित की गई। उत्तराखंड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति मनोज तिवारी ने विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

गांवों की प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच देने की पहल

‘रन टू लाइव’ संस्था का उद्देश्य केवल मैराथन का आयोजन करना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें बड़े मंच तक पहुंचाना भी है। आयोजकों ने कहा कि उत्तराखंड में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि इन प्रतिभाओं को उचित प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

मैराथन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की भागीदारी और दर्शकों के उत्साह ने आयोजन को और खास बना दिया। मानसून की बारिश और पहाड़ी मौसम के बीच धावकों ने जिस तरह अपने लक्ष्य को हासिल किया, उसने उनके हौसले और खेल भावना को प्रदर्शित किया।

खिलाड़ियों को सरकारी सहयोग की जरूरत

एफवीओ— उत्तराखंड में खिलाड़ियों और खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। नैनीताल मानसून मैराथन में उमड़ा उत्साह और खिलाड़ियों का जोश इसका प्रमाण है।

ऐसे में जरूरी है कि सरकार की ओर से भी खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, खेल सुविधाएं, आर्थिक सहायता और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग करने के अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि उत्तराखंड की प्रतिभाएं राज्य और देश का नाम रोशन कर सकें।

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