नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के इनोवेशन एवं इन्क्यूबेशन सेल की ओर से सीआरएसटी इंटर कॉलेज में विद्यार्थियों के लिए आउटरीच कार्यक्रम के तहत कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार, उद्यमिता, बौद्धिक संपदा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नए व्यावसायिक अवसरों के प्रति जागरूकता पैदा करना रहा।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए इनोवेशन एवं इन्क्यूबेशन सेल के निदेशक प्रो. आशीष तिवारी ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को केवल नौकरी तलाशने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नौकरी देने वाला बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
इसके लिए युवाओं में उद्यमी बनने की सोच विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कुमाऊं विश्वविद्यालय का इनोवेशन एवं इन्क्यूबेशन सेल विद्यार्थियों और युवाओं के अभिनव प्रोजेक्टों को प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें आवश्यक सहयोग भी प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न विषयों में बेहतर शिक्षा और कौशल हासिल कर युवा सफल प्रोफेशनल बनने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकते हैं।
कार्यशाला का संचालन करते हुए वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी ने विद्यार्थियों को बौद्धिक संपदा के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मानव मस्तिष्क किसी भी नए आविष्कार और नवाचार का आधार है। किसी नए विचार या आविष्कार को आगे बढ़ाने में बौद्धिक संपदा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित और विशिष्ट राष्ट्र बनाने के लिए प्रत्येक युवा को देश की आर्थिक उन्नति में योगदान देना होगा। इसके लिए नए विचारों, नवाचार और नए व्यावसायिक क्षेत्रों को विकसित करने की आवश्यकता है।
हर्ष वर्धन चौधरी ने विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव और उपयोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एआई के अनेक फायदे हैं, लेकिन यह मानव द्वारा विकसित तकनीक है। ऐसे में सभी को अपने मस्तिष्क और रचनात्मक क्षमता का अधिक से अधिक प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से एआई के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को समझते हुए इसका जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने का आह्वान किया।
प्रभात मठपाल ने मोबाइल तकनीक के उपयोग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मोबाइल आज के समय में काफी उपयोगी साधन है, लेकिन इसके माध्यम से केवल मनोरंजन तक सीमित रहने के बजाय कुछ नया और रचनात्मक किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीक का उपयोग सीखने, कौशल विकास और नए अवसर तलाशने के लिए करने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. इकराम जीत सिंह ने कहा कि किसी भी कार्य में वैल्यू एडिशन करके बाजार में बेहतर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नया करने की सोच और उत्पाद या कार्य की गुणवत्ता आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। युवाओं को अपने आसपास उपलब्ध संसाधनों और अवसरों की पहचान कर उन्हें नए तरीके से उपयोग में लाने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।
विद्यालय के प्रधानाचार्य मनोज पांडे ने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। व्यक्ति जैसा सोचता है, उसी दिशा में उसके व्यक्तित्व और कार्यों का विकास होता है। उन्होंने कहा कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि लगन, मेहनत और सोच उस कार्य को विशेष बनाती है।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से नवाचार, उद्यमिता, एआई, बौद्धिक संपदा और रोजगार से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका वक्ताओं ने विस्तार से जवाब दिया। इस दौरान विद्यार्थियों को कुमाऊं विश्वविद्यालय के इनोवेशन एवं इन्क्यूबेशन सेल की ओर से किए जा रहे विभिन्न कार्यों और विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सहायता के बारे में भी जानकारी दी गई।
कार्यशाला के बाद इनोवेशन एवं इन्क्यूबेशन सेल की टीम ने सीआरएसटी इंटर कॉलेज में किए जा रहे ऑयस्टर मशरूम उत्पादन का भी निरीक्षण किया और इसकी प्रक्रिया तथा संभावनाओं की जानकारी ली। इस दौरान विद्यार्थियों को स्थानीय संसाधनों पर आधारित स्वरोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों से भी अवगत कराया गया।
अंत में प्रो. ललित तिवारी ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में सीआरएसटी इंटर कॉलेज के विद्यार्थी, डॉ. शोबन सिंह बिष्ट, जीडी लोहनी, रितेश साह, जीना सहित अन्य शिक्षक एवं कर्मचारी मौजूद रहे।










