हवन में शामिल थे दलित समाज के सदस्य, फिर छुआछूत का आरोप कैसे? रेखा आर्या ने कहा- हिंदुओं को बांट रही कांग्रेस
हल्द्वानी में शुद्धीकरण हवन पर सियासत तेज, श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास ने कांग्रेस के आरोपों को बताया निराधार
हल्द्वानी। हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आठ अगस्त को आयोजित कांग्रेस की शंखनाद रैली के बाद हुए शुद्धीकरण हवन को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है।
कांग्रेस द्वारा लगाए गए दलित विरोधी मानसिकता के आरोपों के जवाब में शुद्धीकरण हवन कराने वाली संस्था श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास शनिवार को सामने आई और कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह गलत एवं भ्रामक बताया।
कांग्रेस का आरोप है कि रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली के बाद इसलिए शुद्धीकरण हवन कराया गया क्योंकि रैली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे शामिल हुए थे, जो दलित समाज से आते हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा और आरएसएस समर्थकों द्वारा कराया गया शुद्धीकरण हवन दलित विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। इस मुद्दे को लेकर खरगे द्वारा राज्यसभा में भी मामला उठाए जाने का उल्लेख किया गया है।
वहीं, इस पूरे विवाद पर शनिवार को श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के सदस्य अंकित पाल और विनोद आर्या ने प्रेसवार्ता कर कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया। दोनों ने कहा कि वे स्वयं दलित समुदाय से आते हैं और ऐसे में यह कहना कि दलित समाज से आने वाले किसी व्यक्ति की वजह से शुद्धीकरण हवन कराया गया, पूरी तरह गलत है।
रामपुर रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित प्रेसवार्ता में संस्था के सदस्य अंकित पाल ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को जाति के आधार पर राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष दलित समाज से हैं और इसी कारण हवन कराया गया, तो यह आरोप तथ्यों से परे है।
अंकित पाल ने कहा, “मैं स्वयं दलित समाज से आता हूं। कांग्रेस की रैली के बाद रामलीला मैदान में फैली गंदगी को साफ किया गया और उसके बाद हवन-पूजन किया गया। इस दौरान किसी व्यक्ति या किसी जाति का नाम नहीं लिया गया।”
न्यास के सदस्य विनोद आर्या ने भी कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शुद्धीकरण हवन के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों के लोग मौजूद थे। हवन और पूजन के बाद प्रसाद का वितरण भी किया गया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन को किसी जाति, व्यक्ति या राजनीतिक दल से जोड़ना उचित नहीं है।
इस दौरान न्यास के अध्यक्ष गिरीश पांडे ने कहा कि रामलीला मैदान धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। उनके अनुसार, आठ अगस्त को आयोजित कांग्रेस की शंखनाद रैली के दौरान कुछ नारे लगाए जाने के वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुए थे। इसके बाद न्यास के सदस्य रामलीला मैदान पहुंचे, जहां उन्हें परिसर में काफी गंदगी मिली।
गिरीश पांडे ने बताया कि लगातार दो दिनों तक मैदान की स्थिति खराब रहने के बाद 11 अगस्त को परिसर की सफाई कराई गई और इसके बाद वहां हवन-पूजन किया गया। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य किसी व्यक्ति, समुदाय या जाति विशेष को लेकर कोई टिप्पणी करना नहीं था।
उन्होंने कहा, “हम लोगों ने रामलीला मैदान में फैली गंदगी की सफाई कर स्थल को पूजा योग्य बनाने के उद्देश्य से हवन किया था। किसी व्यक्ति के नाम या किसी जाति का उल्लेख नहीं किया गया।”
राहुल गांधी द्वारा इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं होने को लेकर उठाए गए सवालों पर भी गिरीश पांडे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राहुल गांधी को इस मुद्दे की पूरी जानकारी नहीं होने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें क्षेत्रीय स्तर पर गलत जानकारी दी जा रही है।
गिरीश पांडे ने दावा किया कि हवन और सफाई कार्यक्रम में समाज के सभी वर्गों के लोगों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि वहां मौजूद सवर्ण समाज के लोगों ने भी स्वयं झाड़ू-पोंछा लगाकर परिसर की सफाई की, जबकि दलित समाज के लोगों ने हवन में आहुति दी और प्रसाद वितरण में सहयोग किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस पूरे मामले को जातीय आधार पर पेश कर हिंदू समाज को बांटने का प्रयास कर रही है। न्यास के पदाधिकारियों ने कहा कि शुद्धीकरण हवन को किसी जाति या व्यक्ति विशेष से जोड़ना गलत है और कांग्रेस को इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय तथ्यों को सामने रखना चाहिए।
फिलहाल, रामलीला मैदान में हुए शुद्धीकरण हवन को लेकर कांग्रेस और श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। एक ओर कांग्रेस इसे दलित समाज और अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के अपमान से जोड़ रही है, वहीं न्यास का कहना है कि हवन केवल मैदान की सफाई और धार्मिक आस्था के उद्देश्य से किया गया था। ऐसे में यह मामला अब हल्द्वानी की स्थानीय राजनीति में एक बड़ा विवाद बनता जा रहा है।










