बनबसा। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा के प्रमुख सीमांत क्षेत्र बनबसा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सैनिक स्मारक एवं झंडा पार्क का विधिवत पूजा-अर्चना के साथ लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
एसएसबी जवानों द्वारा बिगुल वादन के बीच मुख्यमंत्री सहित कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने दो मिनट का मौन धारण कर वीर शहीदों को नमन किया। इसके बाद नवनिर्मित शहीद स्मारक का लोकार्पण किया गया और विशाल राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराया गया। सीमांत क्षेत्र में बने इस स्मारक और झंडा पार्क को सैनिकों के साहस, शौर्य और बलिदान की स्मृतियों को संजोने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
‘शहीद स्मारक आने वाली पीढ़ियों को देगा प्रेरणा’
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सीमांत क्षेत्र में शहीद स्मारक और विशाल तिरंगे का लोकार्पण उनके लिए गौरव और सम्मान का क्षण है। उन्होंने कहा कि यह स्मारक उन वीर सैनिकों के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान की यादों को हमेशा जीवंत रखेगा, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
उन्होंने कहा कि शहीद स्मारक केवल एक स्मृति स्थल नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र भी बनेगा। युवा यहां से देश सेवा, त्याग और समर्पण की भावना ग्रहण करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे जवान विषम भौगोलिक और कठिन परिस्थितियों के बावजूद देश की सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी निष्ठा से डटे रहते हैं।
‘सीमांत क्षेत्र अब देश के पहले क्षेत्र’
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले जिन सीमावर्ती इलाकों को देश के ‘अंतिम गांव’ या ‘अंतिम क्षेत्र’ के रूप में देखा जाता था, उन्हें अब देश के ‘पहले क्षेत्र’ के रूप में पहचान दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के नेतृत्व में सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के साथ-साथ सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण तथा वीर शहीदों की स्मृतियों को सम्मान देने को प्राथमिकता दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं स्वयं एक सैनिक का पुत्र हूं। इसलिए सैनिकों के सम्मान से जुड़े इस पावन कार्य में सहभागी बनना मेरे लिए अत्यंत भावुक और गर्व का विषय है।”
उत्तराखंड की सैन्य परंपरा का किया उल्लेख
सीएम धामी ने उत्तराखंड की सैन्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखंड वीर सैनिकों की भूमि है। प्रदेश के लगभग हर परिवार का किसी न किसी रूप में सेना या अर्धसैनिक बलों से जुड़ाव रहा है। उत्तराखंड के वीर जवान लगातार देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सैनिकों का योगदान राष्ट्र की सुरक्षा के लिए सर्वोपरि है। राज्य सरकार सैनिकों, वीर नारियों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान एवं कल्याण के लिए लगातार प्रतिबद्ध है।
वीर नारियों और वीरता पदक विजेता सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वीर नारियों और वीरता पदक विजेता को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में वीर नारी सरस्वती देवी, पत्नी स्वर्गीय सिपाही उत्तम चंद; लक्ष्मी देवी, पत्नी स्वर्गीय हवलदार किशन सिंह; कमला देवी, पत्नी स्वर्गीय गार्डसमैन दुर्गादत्त; खीमा देवी, पत्नी स्वर्गीय नायक हयात सिंह; माया चंद, पत्नी स्वर्गीय सिपाही ललित मोहन; सरस्वती देवी, पत्नी स्वर्गीय ला. ना. जय बहादुर चंद; ललिता चंद, पत्नी स्वर्गीय सिपाही प्रेम चंद; गीता देवी, पत्नी स्वर्गीय नायक जगदीश सिंह और पिंकी रैसवाल, पत्नी स्वर्गीय सिपाही राहुल रैसवाल शामिल रहीं।
इसके अलावा वीर माता लक्ष्मी देवी, माता स्वर्गीय नायक खीम सिंह तथा वीरता पदक विजेता सूबेदार गोपाल दत्त शर्मा (सेना मेडल) को भी मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया।
वीर नारियों और पूर्व सैनिकों से किया संवाद
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने वीर नारियों और भूतपूर्व सैनिकों से संवाद किया और उनकी समस्याओं एवं अनुभवों को जाना। उन्होंने एसएसबी जवानों के साथ फोटो खिंचवाकर उनका उत्साहवर्धन भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा में तैनात सैनिकों का योगदान सर्वोपरि है। उनके साहस और बलिदान के कारण ही देशवासी सुरक्षित जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान के लिए राज्य सरकार आगे भी निरंतर प्रयास करती रहेगी।
कार्यक्रम में जिलाधिकारी मनीष कुमार, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल उमेद सिंह (सेवानिवृत्त), एसएसबी कमांडेंट सुरेंद्र विक्रम सहित अन्य अधिकारी, सेवानिवृत्त सैनिक, वीर माताएं और वीर नारियां मौजूद रहीं।










