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देहरादून/नैनीताल। उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में कुदरत का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। पिछले 24 से 48 घंटों से लगातार जारी मूसलाधार बारिश ने प्रदेशभर में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पहाड़ों में जगह-जगह भूस्खलन और मलबा आने से सड़कें बंद हो रही हैं, जबकि मैदानी इलाकों में नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ने से बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश के नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, उत्तरकाशी, चंपावत और राजधानी देहरादून समेत कई जनपदों में 02 सितंबर को भारी से अत्यंत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग की ओर से विभिन्न क्षेत्रों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने के बाद शासन-प्रशासन पूरी तरह हाई अलर्ट मोड पर आ गया है।

भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली चमकने और तेज गर्जना की चेतावनी ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। वहीं अल्मोड़ा, चंपावत, नैनीताल और उत्तरकाशी के जलग्रहण क्षेत्रों में अचानक जलस्तर बढ़ने तथा मध्यम स्तर की त्वरित बाढ़ का गंभीर खतरा बताया जा रहा है।

छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए कई जिलों में स्कूल बंद

मौसम विभाग की चेतावनी और लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए जिलाधिकारियों ने एहतियाती कदम उठाते हुए कई जनपदों में 02 सितंबर को अवकाश घोषित कर दिया है।

देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और उधम सिंह नगर में कक्षा 1 से 12वीं तक संचालित सरकारी और गैर-सरकारी विद्यालयों के साथ ही शिक्षण संस्थानों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पूर्ण अवकाश घोषित किया गया है।

अल्मोड़ा जिले में भारी बारिश और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए महाविद्यालयों को भी बंद रखने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन ने अभिभावकों और आम नागरिकों से अपील की है कि मौसम की स्थिति सामान्य होने तक अनावश्यक यात्रा से बचें और बच्चों को नदी-नालों तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के पास न जाने दें।

नैनीताल में हालात चिंताजनक, गौला और शिप्रा नदी उफान पर

नैनीताल जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। जिले के पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार मलबा और बोल्डर गिरने से सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। विभिन्न स्थानों पर भूस्खलन के चलते करीब 25 ग्रामीण और मुख्य सड़क मार्ग अवरुद्ध होने की सूचना है, जिससे कई गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया है।

काठगोदाम स्थित गौला बैराज से करीब 27 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद गौला नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। नदी के उफान पर आने से आसपास के निचले इलाकों और नदी किनारे स्थित बस्तियों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभाग नदी किनारे के क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। लोगों को नदी के आसपास न जाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की जा रही है।

कलसिया नाला भी उफान पर, लोगों में दहशत

काठगोदाम क्षेत्र का कलसिया नाला भी लगातार बारिश के चलते उफान पर बह रहा है। तेज बहाव के कारण आसपास रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल है। स्थानीय प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।

कैंची धाम के पास शिप्रा नदी का बढ़ा जलस्तर

विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम क्षेत्र में भी लगातार बारिश का असर देखने को मिल रहा है। मंदिर के समीप बहने वाली शिप्रा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है, जिससे प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है।

लगातार बारिश के कारण पहाड़ी ढलानों से मलबा आने की संभावना बनी हुई है। कैंची धाम आने-जाने वाले श्रद्धालुओं और यात्रियों से मौसम की स्थिति को देखते हुए विशेष सावधानी बरतने की अपील की जा रही है।

हाईवे और प्रमुख मार्गों पर मलबा, यातायात बाधित

मूसलाधार बारिश के कारण हल्द्वानी-नैनीताल मार्ग, कालाढूंगी मार्ग और हल्द्वानी-अल्मोड़ा हाईवे के विभिन्न हिस्सों में मलबा गिरने से यातायात प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर भारी मात्रा में पत्थर और मलबा सड़क पर आने के कारण वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी।

कुछ स्थानों पर वाहन भी मलबे की चपेट में आने की सूचना है। लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और प्रशासन की टीमें बंद सड़कों को खोलने में जुटी हुई हैं, लेकिन लगातार बारिश राहत एवं सड़क खोलने के कार्य में बड़ी बाधा बन रही है।

प्रशासन हाई अलर्ट पर, लोगों से सतर्क रहने की अपील

प्रदेश में लगातार बिगड़ते मौसम को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग, पुलिस, प्रशासन और अन्य राहत एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है और नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बिना जरूरी कारण पहाड़ी मार्गों पर यात्रा न करें। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, नदी-नालों और तेज बहाव वाले स्थानों से दूर रहें तथा किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन और आपदा नियंत्रण कक्ष को तत्काल सूचना दें।

उत्तराखंड में लगातार जारी बारिश ने एक बार फिर मानसून के दौरान पहाड़ों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आने वाले घंटों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना को देखते हुए प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती लोगों की सुरक्षा, बंद सड़कों को खोलना और संवेदनशील इलाकों में संभावित आपदा से निपटना बनी हुई है।

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