ज्योलीकोट। भीमताल विकासखंड के ज्योलीकोट और आसपास के करीब 8 से 10 गांवों में पीलिया, डायरिया और टायफाइड के प्रकोप से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

दूषित पेयजल आपूर्ति को संक्रमण फैलने की प्रमुख वजह माना जा रहा है। हालात लगातार गंभीर होने के बीच क्षेत्र में जनस्वास्थ्य संकट जैसी स्थिति पैदा हो गई है।

संक्रमण की भयावह स्थिति को देखते हुए ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश सिंह बिष्ट के हस्तक्षेप और प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक कार्रवाई के बाद स्कूली बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ज्योलीकोट तथा आसपास के क्षेत्र के कई सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों और आंगनबाड़ी केंद्रों को अग्रिम आदेश तक बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।

इन शिक्षण संस्थानों में रहेगा अवकाश

प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार अग्रिम आदेश तक निम्न शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे—

राजकीय इंटर कॉलेज, ज्योलीकोट

राजकीय प्राथमिक विद्यालय, ज्योली

राजकीय प्राथमिक विद्यालय, ज्योलीकोट

राजकीय प्राथमिक विद्यालय, गांजा

राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, छीड़ागांजा

हिमालयन एकेडमी, ज्योलीकोट

सेंट एंथोनी कॉन्वेंट, ज्योलीकोट

सेंट एंथोनी कॉलेज, ज्योलीकोट

बाल संसार स्कूल, ज्योलीकोट

नेचर वैली इंटरनेशनल स्कूल, सरियाताल

इसके अलावा ज्योली, ज्योलीकोट, सरियाताल, भल्यूटी और बेलुवाखान के आंगनबाड़ी केंद्र भी अग्रिम आदेश तक बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।

दो मौतों के बाद ग्रामीणों में आक्रोश और भय

जलजनित संक्रमण की स्थिति कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि क्षेत्र में अब तक दो लोगों की मौत होने की बात सामने आई है। दो जिंदगियां जाने के बाद ग्रामीणों में भय के साथ-साथ प्रशासन के प्रति आक्रोश भी बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि दूषित पेयजल की समस्या का तत्काल समाधान नहीं किया गया तो संक्रमण और अधिक गांवों में फैल सकता है।

दूषित पेयजल बना चिंता का बड़ा कारण

क्षेत्र में पीलिया, डायरिया और टायफाइड के मामले सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल पेयजल की गुणवत्ता को लेकर खड़ा हो गया है। ग्रामीणों के बीच दूषित पानी को संक्रमण का संभावित कारण बताया जा रहा है। ऐसे में पेयजल स्रोतों की जांच, पानी के नमूनों की जांच और प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था करना बेहद जरूरी हो गया है।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सतर्क

संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने का निर्णय बच्चों को संभावित संक्रमण से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर स्थिति की निगरानी और प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत है।

फिलहाल क्षेत्रवासियों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।

ग्रामीणों की मांग है कि दूषित पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, प्रभावित लोगों की स्वास्थ्य जांच कराई जाए और संक्रमण के वास्तविक कारणों की तत्काल जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएं।

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