एसटीएच में इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, ₹30 हजार स्टाइपेंड की मांग पर अड़े
हल्द्वानी। राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों की मासिक स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल मंगलवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रही। डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय परिसर में इंटर्न डॉक्टरों ने प्रदर्शन करते हुए वर्तमान में मिल रहे ₹17 हजार मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹30 हजार किए जाने की मांग दोहराई।
इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान समय में बढ़ती महंगाई और अन्य राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाले स्टाइपेंड की तुलना में उत्तराखंड में दी जा रही राशि काफी कम है। उनका कहना है कि इंटर्नशिप के दौरान उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में सेवाएं देनी पड़ती हैं और लगातार जिम्मेदारियां निभानी होती हैं, ऐसे में मौजूदा स्टाइपेंड उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है।
प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों के अनुसार, स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग को लेकर वे पहले भी शासन और संबंधित अधिकारियों के समक्ष कई बार अपनी बात रख चुके हैं। इसके बावजूद अब तक कोई सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय से मांगों पर कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें अनिश्चितकालीन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
हड़ताल के चलते इंटर्न डॉक्टरों ने ओपीडी, आईपीडी, वार्डों और विभिन्न विभागों की नियमित इंटर्नशिप ड्यूटी से दूरी बनाई हुई है। हालांकि, मरीजों की गंभीर स्थिति और मानवीय जिम्मेदारी को देखते हुए इंटर्न डॉक्टरों ने आपातकालीन सेवाओं को हड़ताल से बाहर रखा है। उनका कहना है कि किसी भी गंभीर मरीज को परेशानी न हो, इसके लिए इमरजेंसी सेवाओं में सहयोग जारी रखा जा रहा है।
इंटर्न डॉक्टर प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक अस्पताल परिसर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जा रहा है तथा इसका उद्देश्य केवल अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को शासन तक मजबूती से पहुंचाना है।
इंटर्न डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मुख्य मांग पर शासन की ओर से सकारात्मक और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। लगातार दूसरे दिन भी हड़ताल जारी रहने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग और शासन के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
यदि जल्द ही इस मामले का समाधान नहीं निकला तो अस्पताल की ओपीडी, वार्डों और अन्य नियमित स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर इसका असर और अधिक बढ़ने की संभावना है। ऐसे में मरीजों की सुविधा और अस्पताल की सुचारु व्यवस्था बनाए रखने के लिए शासन और स्वास्थ्य विभाग से जल्द समाधान निकालने की मांग तेज होती जा रही है।




