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देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पहाड़ों में जगह-जगह मलबा और पत्थर गिरने से सड़कें बार-बार बाधित हो रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों के साथ ही यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के देहरादून स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने 9 सितंबर के लिए ताजा मौसम पूर्वानुमान जारी करते हुए राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम के खराब बने रहने की चेतावनी दी है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के सभी पर्वतीय जिलों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और बारिश के तीव्र से अति तीव्र दौर देखने को मिल सकते हैं।

इन जिलों में विशेष सतर्कता की अपील

मौसम विभाग ने बागेश्वर, पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, टिहरी और नैनीताल जिलों के संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।

पर्वतीय मार्गों पर कई स्थानों पर मलबा गिरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में सड़कें बंद होने से यातायात प्रभावित हो रहा है और यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ सकता है। प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने भी बंद मार्गों को खोलकर यातायात सुचारु रखने की बड़ी चुनौती बनी हुई है।

10 से 12 सितंबर तक भारी बारिश की आशंका

मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए भी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि बारिश का दौर अभी थमने वाला नहीं है। 10 सितंबर से 12 सितंबर तक प्रदेश के कई जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की प्रबल संभावना जताई गई है।

विशेष रूप से देहरादून, टिहरी, नैनीताल, बागेश्वर, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिलों में मौसम अधिक सक्रिय रहने की संभावना है। भारी बारिश के दौरान नदियों और नालों के जलस्तर में अचानक वृद्धि, भूस्खलन और सड़क बाधित होने जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।

14 सितंबर तक सक्रिय रहेगा मानसून

आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तराखंड में 14 सितंबर तक मानसूनी गतिविधियां पूरी तरह सक्रिय रहने का अनुमान है। इस दौरान राज्य के लगभग सभी जिलों में अनेक स्थानों पर रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

लगातार सक्रिय मानसून को देखते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और यात्रियों से मौसम की ताजा जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करने की अपील की जा रही है। संवेदनशील ढलानों, नदी-नालों के किनारे और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

पहाड़ों में अगले कुछ दिन मौसम के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण रहने की संभावना है और बारिश के साथ भूस्खलन का खतरा प्रशासन तथा आम लोगों दोनों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

बागेश्वर में NH-109K ठप, जिले की 12 सड़कें बंद होने से संपर्क कटा

बागेश्वर जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने सबसे ज्यादा तबाही मचा रखी है. देहरादून-गरुड़-बागेश्वर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-109K) पर रवाइंखाल के पास विशालकाय बोल्डर और भारी मलबा गिरने से सड़क यातायात पूरी तरह रुक गया है. बीआरओ की जेसीबी और पोकलेन मशीनें लगातार मलबा हटाने के काम में जुटी हुई हैं, लेकिन पहाड़ी से लगातार गिर रहे पत्थरों के चलते राहत एवं बचाव कार्य में भारी जोखिम उठाना पड़ रहा है. यह हिस्सा बीते एक हफ्ते से खतरनाक स्लाइडिंग जोन में तब्दील हो चुका ह।

राष्ट्रीय राजमार्ग के अलावा जिले के ग्रामीण अंचलों की 12 अन्य सड़कें भी भूस्खलन की जद में आकर पूरी तरह बंद पड़ी हैं. इसके कारण गांवों तक आवश्यक वस्तुओं और दूध-सब्जियों की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो गई है. सड़कों पर दोनों तरफ फंसे वाहन चालक घंटों से रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं।

कपकोट के बघर गांव में जमीन धंसने से ग्रामीणों में खौफ

बागेश्वर के ही कपकोट तहसील अंतर्गत बघर गांव के हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं. गांव को तहसील और जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले सभी प्रमुख सड़क मार्ग जगह-जगह भूस्खलन की चपेट में आकर बह गए हैं. संपर्क मार्ग टूटने के साथ ही गांव के अलग-अलग हिस्सों में जमीन धंसने की नई घटनाएं सामने आई हैं, जिससे मकानों में दरारें पड़ने का खतरा मंडराने लगा है और ग्रामीणों में भारी दहशत है. ग्रामीण किसी तरह पैदल पगडंडियों के सहारे सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हैं.

अल्मोड़ा-खैरना हाईवे क्वारब पर भारी वाहनों के लिए दो दिन तक बंद

कुमाऊं मंडल की लाइफलाइन कहे जाने वाले अल्मोड़ा-खैरना हाईवे पर क्वारब के पास लगातार दरक रही पहाड़ी ने सफर को बेहद जोखिमभरा बना दिया है. खतरे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने 8 और 9 सितंबर को इस मार्ग और बाईपास से भारी वाहनों तथा रोडवेज बसों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी है. हालांकि, स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए छोटे निजी वाहनों को सावधानीपूर्वक निकलने की इजाजत दी जा रही है.

मैदानी जिलों में आज कैसा रहेगा मौसम?

राजधानी देहरादून और आसपास के मैदानी इलाकों में 9 सितंबर को मौसम मिला-जुला बना रहेगा. दून के अधिकांश हिस्सों में दिन के समय बादलों की आवाजाही के बीच हल्की धूप खिलेगी और मौसम सामान्य तौर पर साफ दिखेगा, लेकिन शाम ढलते ही कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने की उम्मीद है. वहीं हरिद्वार और उधम सिंह नगर के तराई क्षेत्रों में भी कहीं-कहीं छिटपुट बूंदाबांदी या गरज के साथ बौछार पड़ सकती है. हालांकि मैदानी जिलों के लोगों को उमस से बहुत ज्यादा राहत नहीं मिलने वाली है. मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि देहरादून में 10 सितंबर से मौसम तेजी से पलटेगा और भारी बारिश का नया दौर शुरू होगा, जो 12 सितंबर तक जारी रह सकता है।

नैनीताल, पिथौरागढ़ और सीमांत जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के आसार
सरोवर नगरी नैनीताल और सीमांत जिले पिथौरागढ़ में आज बादलों का डेरा रहेगा. दोनों जनपदों के पर्वतीय भूभागों में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है. मौसम विभाग के अनुसार, पिथौरागढ़ और नैनीताल में 10 और 11 सितंबर को भारी बारिश की संभावना है, जिससे संवेदनशील पहाड़ी सड़कों पर पत्थर गिरने का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा. अल्मोड़ा शहर और आसपास के घाटियों में भी आज हल्की बारिश हो सकती है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी. सीमांत क्षेत्रों में प्रशासन ने नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों को जलस्तर बढ़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।

टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी में 10 से 12 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट
गढ़वाल मंडल के चारधाम यात्रा रूट पर पड़ने वाले जिलों टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी में 9 सितंबर को स्थानीय स्तर पर गरज-चमक के साथ बारिश का एक-दो दौर देखने को मिल सकता है. लेकिन असली चुनौती 10 सितंबर से शुरू होगी. 10 सितंबर को टिहरी, 11 सितंबर को टिहरी, रुद्रप्रयाग व चमोली, और 12 सितंबर को उत्तरकाशी जिले में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

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