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हल्द्वानी। रानीबाग स्थित पौराणिक एवं आस्था के केंद्र चित्रेश्वर धाम में कथित अतिक्रमण के मुद्दे को लेकर अब आंदोलन तेज करने की तैयारी शुरू हो गई है। रविवार को हल्द्वानी के नवाबी रोड स्थित एक बैंक्वेट हॉल में आयोजित कत्युरी समाज की महत्वपूर्ण बैठक में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया और सर्वसम्मति से चित्रेश्वर धाम की भूमि को कथित अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए व्यापक जनआंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया।

बैठक में उपस्थित लोगों ने प्रशासन से रानीबाग स्थित चित्रेश्वर धाम से कथित अतिक्रमण हटाने, माता जिया रानी के भक्तों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष जांच कराने तथा कथित अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग उठाई।

18 से 26 सितंबर तक चलेगा जनजागरूकता और हस्ताक्षर अभियान

बैठक में आंदोलन की चरणबद्ध रणनीति तैयार की गई। तय किया गया कि 18 सितंबर से 26 सितंबर तक व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। अभियान के दौरान हल्द्वानी सहित विभिन्न चौक-चौराहों और पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों से संपर्क किया जाएगा तथा धार्मिक स्थलों की भूमि पर कथित अतिक्रमण के मुद्दे को लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा।

आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को धार्मिक एवं पौराणिक धरोहरों की सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाएगा।

27 सितंबर को हल्द्वानी में होगी बड़ी बैठक

जनजागरूकता अभियान के बाद 27 सितंबर को हल्द्वानी में एक बड़ी बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इस बैठक में पहाड़ी समाज से जुड़े राजनीतिक, सामाजिक और व्यापारिक वर्ग के प्रमुख लोगों को शामिल करने की योजना बनाई गई है।

बैठक में आंदोलन की आगामी रणनीति, जनभागीदारी और प्रशासन के रुख को देखते हुए आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

कार्रवाई नहीं हुई तो 5 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन धरना

बैठक में वक्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रशासन द्वारा इस दौरान रानीबाग चित्रेश्वर धाम से कथित अतिक्रमण हटाने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो 5 अक्टूबर से हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में हजारों लोगों की मौजूदगी में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।

वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन को केवल हल्द्वानी या नैनीताल जिले तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर इसे आगे चलकर राज्यव्यापी आंदोलन का रूप दिया जाएगा।

धार्मिक स्थलों और पौराणिक धरोहरों की रक्षा का मुद्दा

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं है, बल्कि देवभूमि की धार्मिक आस्था, पौराणिक धरोहरों और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में धार्मिक स्थलों की भूमि पर कथित अतिक्रमण, वहां मिलने वाले चंदे और चढ़ावे तथा धार्मिक स्थलों से संबंधित व्यवस्थाओं को लेकर सरकार से पारदर्शिता और स्पष्ट हिसाब की मांग की जाएगी। साथ ही धार्मिक स्थलों की भूमि को कथित अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए व्यापक स्तर पर आवाज उठाई जाएगी।

49 लोगों पर झूठे मुकदमे दर्ज करने का आरोप

बैठक को संबोधित करते हुए पहाड़ी आर्मी उत्तराखंड के अध्यक्ष हरीश रावत ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने दबाव में आकर समाज के 49 लोगों के खिलाफ झूठे और फर्जी मुकदमे दर्ज किए हैं।

उन्होंने कहा कि अब पहाड़ के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी संस्कृति, पौराणिक धरोहरों और सनातन परंपराओं की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जाएगा तथा इसके माध्यम से जनभावनाओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाया जाएगा।

चित्रेश्वर धाम को बताया ऐतिहासिक और आस्था का केंद्र

हरीश रावत ने कहा कि रानीबाग स्थित चित्रेश्वर धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह पहाड़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि इस धरोहर की रक्षा के लिए आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

बैठक में प्रदीप रौतेला, राजेंद्र कांडपाल, मनोज कुमार पांडे, मनोहर सिंह रावत, ललित मनराल, लीला देवी, दीपिका मंगोली, सीता रावत, रमा पांडे, अंजू पांडे, प्रेमा मेर, हरेंद्र राणा, संतोष सिंह नेगी, आन सिंह रावत, भुवन चंद पांडे, हिमांशु शर्मा, सतीश फुलारा, हरेंद्र, कविता जीना, दीपा बोरा, महेश चंद्र भट्ट, अशोक सिंह रौतेला, आनंद सिंह कुनियाल, विनोद कुमार जोशी और रमेश सिंह सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

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