पहाड़ के प्रधानों की हुंकार! नेटवर्क नहीं तो ऑनलाइन हाजिरी नहीं, सरकार से ऑफलाइन व्यवस्था की मांग
सरकार को चेतावनी: पंचायतों के अधिकार बहाल करो, नहीं तो प्रधान संगठन करेगा बड़ा आंदोलन
नेटवर्क समस्या के चलते श्रमिकों की उपस्थिति ऑफलाइन करने और अकुशल श्रमिकों को 600 रुपये प्रतिदिन मजदूरी देने की मांग
नैनीताल। प्रधान संगठन जनपद नैनीताल की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को जिला अध्यक्ष गोपाल अधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में पंचायती राज संस्थाओं के अधिकारों, ग्रामीण रोजगार, पंचायतों की आर्थिक स्थिति और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि राज्य सरकार पंचायतों से संबंधित प्रमुख मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो प्रधान संगठन न्यायालय की शरण लेने को बाध्य होगा।
बैठक में सबसे प्रमुख रूप से पंचायती राज एक्ट में निर्धारित 29 विषयों को प्रभावी रूप से पंचायतों को हस्तांतरित करने की मांग उठाई गई। प्रधान संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिन 29 विषयों की व्यवस्था की गई है, उनका वास्तविक और प्रभावी क्रियान्वयन होना आवश्यक है। संगठन ने राज्य सरकार से इन विषयों को पंचायतों को हस्तांतरित करने की मांग करते हुए स्पष्ट किया कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो प्रधान संगठन न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा।
बैठक में V-B-G RAM G योजना के अंतर्गत श्रमिकों की उपस्थिति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रधानों ने कहा कि उत्तराखंड एक पर्वतीय राज्य है और ग्रामीण एवं दुर्गम क्षेत्रों में आज भी मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी की गंभीर समस्या बनी हुई है। ऐसे में श्रमिकों की उपस्थिति को पूरी तरह ऑनलाइन दर्ज करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
संगठन ने मांग की कि श्रमिकों की उपस्थिति को पूर्ण रूप से ऑफलाइन व्यवस्था के माध्यम से दर्ज करने की सुविधा दी जाए। पदाधिकारियों का कहना था कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार कार्यों के संचालन में आसानी होगी, श्रमिकों को काम मिलने में बाधा नहीं आएगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ने से पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी।
प्रधान संगठन ने अकुशल और कुशल श्रमिकों की मजदूरी बढ़ाने की भी मांग उठाई। बैठक में कहा गया कि वर्तमान परिस्थितियों और बढ़ती महंगाई को देखते हुए अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी 600 रुपये प्रतिदिन तथा कुशल श्रमिकों की मजदूरी 800 रुपये प्रतिदिन किया जाना न्यायोचित होगा।
बैठक में राशन कार्ड बनाए जाने की प्रक्रिया में ग्राम प्रधानों की स्पष्ट भूमिका तय करने की मांग भी की गई। प्रधानों ने कहा कि ग्राम स्तर पर प्रधान स्थानीय परिस्थितियों और पात्र परिवारों की वास्तविक स्थिति से भली-भांति परिचित होते हैं। इसलिए राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका निर्धारित की जानी चाहिए, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजना के लाभ से वंचित न रह सके।
पर्वतीय क्षेत्रों के विकास को लेकर प्रधान संगठन ने कहा कि धनराशि का आवंटन केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय प्रदेश में गांवों का क्षेत्रफल अधिक होने के साथ-साथ भौगोलिक परिस्थितियां भी कठिन हैं। इसलिए पर्वतीय क्षेत्रों में धन का आवंटन जनसंख्या के साथ-साथ क्षेत्रफल को आधार बनाकर किया जाना चाहिए।

बैठक में यह भी मांग रखी गई कि ग्राम पंचायत क्षेत्र में किसी भी विभाग द्वारा कराए जाने वाले विकास या निर्माण कार्य से पहले संबंधित ग्राम पंचायत की एनओसी अनिवार्य की जाए। प्रधानों का कहना था कि ग्राम पंचायत की जानकारी और सहमति के बिना विभिन्न विभागों द्वारा कार्य कराए जाने से स्थानीय स्तर पर समन्वय की समस्या पैदा होती है।
प्रधान संगठन ने ग्राम प्रधानों के मानदेय को लेकर भी सरकार से नई व्यवस्था बनाने की मांग की। संगठन का कहना है कि प्रधानों को दिया जाने वाला मानदेय राज्य वित्त से नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि इसके लिए अलग से एक मद बनाकर ग्राम प्रधानों के लिए सम्मानजनक मानदेय की व्यवस्था की जानी चाहिए।
बैठक में 16वें वित्त आयोग की नई गाइडलाइन को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। पदाधिकारियों ने बताया कि नई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक परिवार से 100 रुपये प्रतिमाह टैक्स लगाकर ग्राम पंचायतों की आय बढ़ाने की बात कही गई है। साथ ही टैक्स लागू नहीं होने की स्थिति में ग्राम पंचायत को मिलने वाली 16वें वित्त की धनराशि में प्रतिवर्ष 20 प्रतिशत तक कटौती किए जाने का आदेश प्राप्त हुआ है।
प्रधान संगठन ने इस व्यवस्था का विरोध करते हुए सरकार से आदेश में संशोधन करने की मांग की। संगठन का कहना है कि ग्राम पंचायतों को टैक्स लागू करने की बाध्यता से मुक्त किया जाना चाहिए, क्योंकि पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक परिस्थितियां अलग हैं और ऐसे में अतिरिक्त कर का बोझ ग्रामीण परिवारों पर पड़ सकता है।
बैठक में जिला अध्यक्ष और विभिन्न ब्लॉकों के प्रधान संगठन अध्यक्षों तथा जिला संगठन के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा कि जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य विकास अधिकारी से भेंट करेगा। प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से बैठक में उठाए गए सभी बिंदुओं को राज्य सरकार तक भेजा जाएगा।
प्रधान संगठन ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार शीघ्र ही इन मांगों पर सहमति प्रदान नहीं करती है तो जिला प्रधान संगठन आंदोलनात्मक कदम उठाने को बाध्य होगा। संगठन ने कहा कि ऐसी स्थिति में प्रधान पेन डाउन कर अपने मोहरों को सरकार के समक्ष जमा करने के साथ ही न्यायालय की शरण लेने पर भी विचार करेंगे।
बैठक में जिला अध्यक्ष प्रधान संगठन गोपाल अधिकारी, संरक्षक ललित मोहन नेगी, प्रधान संगठन बेतालघाट के अध्यक्ष जे.डी. कत्यूरा, ओखलकांडा प्रधान संगठन अध्यक्ष मदन परगांई, कोटाबाग प्रधान संगठन अध्यक्ष सुरेंद्र बोरा, रामगढ़ प्रधान संगठन अध्यक्ष नंदन सिंह बिष्ट, धारी प्रधान संगठन अध्यक्ष हरीश गंगोला, रामनगर प्रधान संगठन अध्यक्ष नवीन सती, भीमताल प्रधान संगठन अध्यक्ष लक्ष्मण गंगोला, जिला उपाध्यक्ष बच्ची सिंह बिष्ट, जिला उपाध्यक्ष निर्मला जग्गी पंवार, प्रधान किशन दरम्वाल, रमेश जोशी, सुरेंद्र मलवाल, हरेंद्र बिष्ट, हेम वारियाल सहित अनेक प्रधान और पदाधिकारी मौजूद रहे।




