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साधारण परिवार से निकलकर हासिल की बड़ी सफलता, इंटरमीडिएट में भी राज्य की मेरिट में बनाया था स्थान; माता-पिता के संघर्ष और गुरुजनों के मार्गदर्शन को दिया सफलता का श्रेय

रानीखेत। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (यूकेपीएससी) की लोअर पीसीएस परीक्षा में रानीखेत की होनहार बेटी गीतांजलि सती ने 20वीं रैंक हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली गीतांजलि ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार सहित पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। गीतांजलि की सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं और उन्हें साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करते हैं।

गीतांजलि सती की सफलता की कहानी संघर्ष, समर्पण और परिवार के सहयोग की मिसाल है। उनके पिता राजन सती चाय का व्यवसाय करते हैं, जबकि माता सुनीता सती गृहिणी हैं। सामान्य आर्थिक परिस्थितियों के बीच परिवार ने अपनी बेटी की शिक्षा और उसके सपनों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। माता-पिता के त्याग, प्रोत्साहन और सहयोग ने गीतांजलि को अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ने की ताकत दी।

गीतांजलि बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रही हैं। उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा में भी दिया था, जब उन्होंने राज्य की मेरिट सूची में स्थान हासिल किया। पढ़ाई के प्रति उनकी लगन और मेहनत का सिलसिला आगे भी जारी रहा और अब लोअर पीसीएस परीक्षा में 20वीं रैंक प्राप्त कर उन्होंने अपनी प्रतिभा का एक बार फिर परिचय दिया है।

गीतांजलि सती ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने माध्यमिक और इंटरमीडिएट की पढ़ाई विवेकानंद विद्या मंदिर एवं आदर्श राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (जीजीआईसी) से पूरी की। उच्च शिक्षा उन्होंने राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से प्राप्त की।

शिक्षा के विभिन्न पड़ावों पर मिली उपलब्धियों ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रेरित किया। निरंतर मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण के चलते उन्होंने लोअर पीसीएस परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया।

माता-पिता के त्याग और गुरुजनों के मार्गदर्शन को दिया श्रेय

अपनी इस उपलब्धि पर गीतांजलि ने खुशी जाहिर करते हुए सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के त्याग, परिवारजनों के सहयोग और गुरुजनों के अमूल्य मार्गदर्शन को दिया है। उन्होंने कहा कि परिवार और शिक्षकों से मिले प्रोत्साहन ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

गीतांजलि की इस उपलब्धि से रानीखेत क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। उनकी सफलता ने यह संदेश दिया है कि मजबूत इच्छाशक्ति, निरंतर परिश्रम और परिवार के सहयोग से सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। साधारण परिवार से निकलकर प्रतियोगी परीक्षा में यह मुकाम हासिल करने वाली गीतांजलि आज क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं।

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