नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय की ओर से नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के PAIR (Partnerships for Accelerated Innovation and Research) प्रोजेक्ट के तहत चार दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला एवं सेमिनार का आयोजन 3 से 6 अक्टूबर तक देवदार हॉल, एमएमटीटीसी, द हर्मिटेज में किया जाएगा। कार्यशाला में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण एवं शोध संस्थानों के विशेषज्ञ प्रतिभागियों और शोधार्थियों को शोध के विभिन्न पहलुओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।
सेमिनार के चेयरमैन प्रो. नंद गोपाल साहू ने बताया कि राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट करेंगे। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में PAIR प्रोजेक्ट के हब इंस्टीट्यूट इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), बेंगलुरु के साथ जुड़े छह स्पोक इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ भी प्रतिभाग करेंगे। कार्यशाला के लिए अब तक 195 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है।
देश के विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ देंगे आमंत्रित व्याख्यान
कार्यशाला के दौरान विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों के आमंत्रित व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। इनमें IISc बेंगलुरु के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रो. सत्यम सुवास, प्रो. प्रवीण कुमार, प्रो. भगवती प्रसाद, प्रो. अशोक रायचूर, प्रो. अभिक चौधरी और प्रो. ज्योति प्रसाद सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल होंगे।
इसके अलावा NIT नागालैंड के शंभू कुमार महतो, बेंगलुरु विश्वविद्यालय के प्रो. बी. अंगादी, कालीकट विश्वविद्यालय के प्रो. राजीव के. मेनन, पांडिचेरी विश्वविद्यालय के प्रो. पेरुमल एलुमलाई, शिवाजी विश्वविद्यालय के प्रो. के.के. शर्मा, शिवपुर के प्रो. पापु बिस्वास तथा बेंगलुरु की प्रो. पूनम बेंजवाल भी कार्यशाला में आमंत्रित व्याख्यान देंगे।
शोधार्थियों को अत्याधुनिक उपकरणों का मिलेगा प्रशिक्षण
कार्यशाला में केवल व्याख्यान ही नहीं, बल्कि शोधार्थियों के लिए इंस्ट्रूमेंट ट्रेनिंग भी आयोजित की जाएगी। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को शोध कार्य में उपयोग होने वाले उपकरणों एवं तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञ शोधार्थियों को शोध की गुणवत्ता, वैज्ञानिक पद्धतियों और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराएंगे।
कार्यशाला की कॉर्डिनेटर डॉ. गीता तिवारी ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य शोधार्थियों को उच्चस्तरीय शोध के लिए प्रेरित करना तथा उन्हें देश के प्रतिष्ठित शोध संस्थानों के विशेषज्ञों से सीधे संवाद और सीखने का अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन से शोधार्थियों को शोध की नई संभावनाओं और आधुनिक तकनीकों को समझने में मदद मिलेगी।
चार दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के माध्यम से कुमाऊं विश्वविद्यालय के शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के साथ संवाद का अवसर मिलेगा। आयोजकों को उम्मीद है कि यह आयोजन विश्वविद्यालय में शोध एवं नवाचार की संस्कृति को और मजबूत करने में उपयोगी साबित होगा।





































